चारधाम यात्रा 2019: अक्षय तृतीया पर ही क्यों खुलते हैं यमुनोत्री-गंगोत्री धाम के कपाट, पीछे है वरदान
स्थानीय लोगों के मुताबिक सूर्य पुत्री यमुना यम और शनि की बहन हैं। भगवान हनुमान भी यमुना को अपनी बहन मानते हैं। वे तीनों यमुना से बहुत प्रेम करते थे। इसलिए एक बार तीनों अपनी बहन से मिलने पहुंच गए। तो यमुना ने पूछा कि वे उनके लिए क्या लाएं हैं।
इस पर तीनों भाईयों ने उन्हें वरदान दिया कि चार तीर्थों में सबसे पहले यमुना की पूजा होगी। इस दिन जो भी यमुनोत्री धाम आकर दर्शन करेगा उसके सभी पाप धुल जाएंगे। यह दिन अक्षय होगा। इस दिन सारे रुके हुए काम पूरे हो जाएंगे। इस पर यमुना बहुत खुश हुई और गंगा को भी अपने भाईयों से मिलवाया।
उस दिन तीनों ने गंगा को भी यही वरदान दिया कि तुम दोनों सहेलियों के धाम के कपाट एक ही दिन खुलेंगें। यह वरदान उन्होंने बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को दिया। तब से अक्षय तृतीया के दिन ही यह कपाट खुलते हैं।
इसके बाद तीनों भाई वापस चले गए और भाई दूज के दिन वापस अपनी बहन से मिलने आए। तब उन्होंने यमुना को भेंट स्वरूप कुछ मांगने पर तीनों भाईयों ने कहा कि आज से अक्षय तृतीय के दिन से भाई दूज तक जो भी यमुनोत्री धाम से इलाहबाद तक किसी भी तट पर यमुना में स्नान करेगा यम उसकी मृत्यु को टाल देगा। वहीं शनि भी उस व्यक्ति को साढ़े सती के प्रकोप से दूर रखेगा । हनुमान जी ने कहा कि यमुना के धाम आने पर उस व्यक्ति के मैं सारे कष्ट हर लूंगा।
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह मान्यताओं और पुरोहितों के आधार पर पेश किए गए हैं।)