हर्षिल के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला, तो बगोरी के ग्रामीणों का दशकों पुराना दर्द छलक उठा। भारत-चीन युद्ध के दौरान वर्ष 1962 में अपने मूल गांव नेलांग और जाढ़ूंग से बेदखल किए गए ग्रामीणों ने पीएम से समुचित मुआवजा देने या फिर उन्हें फिर से अपने गांवों में बसाने की मांग की।
भारत-चीन सीमा पर पीएम मोदी को देख छलक पड़ा ग्रामीणों का दर्द, दिवाली के तोहफे में मांग ली ये चीज
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पीएम मोदी ने ग्रामीणों को अपने पास बुलाया तो उनके चेहरे खिल उठे। उन्होंने ग्रामीणों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए मिठाई बांटी। बगोरी के प्रधान भवान सिंह राणा ने पीएम को बताया कि वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सेना की जरूरत को देखते हुए जाढ़ूंग एवं नेलांग गांव खाली कराया गया था, लेकिन ग्रामीणों को मुआवजा नहीं दिया गया।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को हर्षिल पहुंचकर सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के कर्मियों के साथ दीपावली मनाई। उनके साथ आर्मी चीफ बिपिन रावत और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद रहे। इस मौके पर जवानों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दूर-दराज के इलाकों में बर्फीले पहाड़ों पर ड्यूटी करने की उनकी लगन राष्ट्र की ताकत को और मजबूत बनाती है।