उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही जंगल की आग को देखते हुए अब वन विभाग के सभी अधिकारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने रविवार को हुई आपात बैठक में यह आदेश जारी किया। इस समय प्रदेश में 40 स्थानों पर जंगल धधक रहे हैं।
उत्तराखंड में आग का तांडव: 40 स्थानों पर धधक रहा पहाड़, 24 घंटे में 69 हेक्टेयर जंगल को हुआ नुकसान
मुख्यमंत्री ने जंगल में आग लगाने वाले तत्वों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने और कुंभ मेला क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने को भी कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में वनाग्नि की घटनाओं को कम से कम करने के लिए तहसील और ब्लॉक स्तर तक कंट्रोल रूम और फायर स्टेशन स्थापित किए जाएं।
एक अक्तूबर 2020 से चार अप्रैल 2021 तक प्रदेश में कुल मिलाकर 1360 हेक्टेयर जंगल को आग के कारण नुकसान हो चुका है। इससे करीब 39.46 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। कुल 22 पशु घायल हुए हैं और सात पशुओं की मौत हुई है। अब पिछले 24 घंटे में ही आग के करीब 45 मामले सामने आए जिससे 69 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। वन विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के मुताबिक पिछले 24 घंटे में आरक्षित वन क्षेत्र में 40 और सिविल/वन पंचायत क्षेत्र में आग के पांच मामले सामने आए हैं। इनमें से 26 मामले गढ़वाल मंडल और आठ मामले कुमाऊं मंडल के हैं। 11 मामले अन्य स्थानों से सामने आए।
यह है स्थिति
- 983 वनाग्नि की घटनाएं
- 1292 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित
- वर्तमान में 40 एक्टिव फायर
- नैनीताल, अल्मोड़ा, टिहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल अधिक प्रभावित
- 12 हजार वन कर्मी तैनात
- 1313 फायर क्रू स्टेशन
उत्तराखंड की वन संपदा सिर्फ राज्य की ही नहीं बल्कि पूरे देश की धरोहर है। राज्य में इस बार सर्दियों में कम बारिश हुई और इस वजह से आग लगने की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। वनों की आग से सिर्फ वन संपदा को ही नुकसान नहीं हो रहा है बल्कि जनहानि और वन्यजीवों को भी नुकसान हो रहा है। इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बात की है और आपात बैठक बुुलाकर पूरी स्थिति की समीक्षा की गई।
- तीरथ सिंह रावत, मुख्यमंत्री