पूर्व सैनिकों को साधने के लिए उत्तराखंड सरकार ने वित्त विभाग की संस्तुति की अनदेखी कर दी। वित्त विभाग ने पूर्व सैनिकों को कैंटीन से मिलने वाली शराब की कीमतों में कटौती की जितनी सिफारिश की थी सरकार ने उसके मुकाबले दो गुना से भी ज्यादा दाम में कमी कर दी।
वोट बैंक के लिए उत्तराखंड सरकार ने सस्ती की शराब!
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कैबिनेट के इस फैसले से राजस्व के मद में लगभग 30 से 40 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। प्रदेश में पूर्व सैनिकों की तादात अच्छी खासी है।
हाल के दिनों में पूर्व सैनिकों ने प्रदेश सरकार के सामने मांग रखी थी कि कैंटीन से मिलने वाली शराब की कीमतों में कटौती की जाए। मुख्यमंत्री हरीश रावत जल्द मांग पूरी करने का आश्वासन दिया था।
इसके बाद शासन ने आबकारी विभाग से प्रस्ताव तय करने को कहा तो विभाग ने यह कहते हुए असहमति जता दी कि इससे 30 से 40 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। आबकारी विभाग की टिप्पणी के बाद वित्त सचिव डीएस गर्ब्याल ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी असहमति जता दी।
इसके बाद इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजा गया जो विभागीय मंत्री भी हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को 30 नवंबर को आयोजित कैबिनेट में रखने का निर्देश दिया। इसके बाद वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव को फिर मंगवाया और सहमति दे दी।