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कोरोना से जूझती सांसे: औद्योगिक ऑक्सीजन खरीदने को मजबूर हुए तीमारदार, लेकिन इससे खतरे में पड़ सकती है जान

Tue, 04 May 2021 11:08 AM IST
अलका त्यागी जितेंद्र जोशी, अमर उजाला, हरिद्वार
जितेंद्र जोशी, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 04 May 2021 11:08 AM IST
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Uttarakhand Coronavirus Oxygen Crisis: People Buying Industrial Oxygen  but this is dangerous for patients
औद्याेगिक ऑक्सीजन - फोटो : अमर उजाला

कोरोना संकट के बीच लोग अपनों की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में लोग सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की खरीदारी को लेकर सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। मारामारी के बीच कई तीमारदार अपने मरीजों के लिए गैस वेल्डिंग की दुकानों से ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर जा रहे हैं, लेकिन इससे मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिलने की बजाय उनकी जान खतरे में पड़ सकती है।



दरअसल, औद्योगिक और चिकित्सकीय ऑक्सीजन की शुद्धता में बड़ा फर्क होता है। ऐसे में औद्योगिक ऑक्सीजन का इस्तेमाल मरीज के फेफड़े के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। 

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कोविड संक्रमितों के केस बढ़ने के साथ ही ऑक्सीजन गैस को लेकर जिले में जबरदस्त मारामारी मची है। खासकर होम आइसोलेट मरीजों को ऑक्सीजन गैस सिलिंडर मिलने में दिक्कत आ रही है। कई पोस्ट कोविड मरीजों को भी ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत पड़ रही है।

ऐसे में मरीज के तीमारदार ऑक्सीजन के लिए भटक रहे हैं। कई तीमारदार गैस वेल्डिंग की दुकानों से भी ऑक्सीजन सिलिंडर उठा रहे हैं। वहीं, वेल्डर भी मरीजों की जान बचाने के लिए तीमारदारों को ऑक्सीजन सिलिंडर दे रहे हैं।

Uttarakhand Coronavirus Oxygen Crisis: People Buying Industrial Oxygen  but this is dangerous for patients
औद्याेगिक ऑक्सीजन - फोटो : अमर उजाला

कई मरीज औद्योगिक ऑक्सीजन गैस का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल आपूर्ति वाले सिलिंडरों में भरी गई ऑक्सीजन 99 फीसदी से अधिक शुद्ध होती है जबकि औद्योगिक ऑक्सीजन की शुद्धता मेडिकल ऑक्सीजन से कम होती है।

Uttarakhand Coronavirus Oxygen Crisis: People Buying Industrial Oxygen  but this is dangerous for patients
ऑक्सीजन लेने के लिए एजेंसी के बाहर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

अगर मरीज औद्योगिक ऑक्सीजन का प्रयोग करते है तो उनके फेफड़े में दिक्कत हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल ऑक्सीजन का प्रयोग भी डॉक्टर के परामर्श और प्रशिक्षित व्यक्ति के देखरेख में करना चाहिए। 

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ऑक्सीजन एजेंसी में जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

बता दें कि जान बचाने के लिए लोग सड़कों पर आंसू बहाने के लिए मजबूर हैं। इस समय गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए दो ही चीजों की सख्त जरूरत पड़ रही है। ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन, लेकिन हाल यह है कि लोग सड़कों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन कहीं भी इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं।

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ऑक्सीजन लेने के लिए एजेंसी के बाहर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

मेडिकल ऑक्सीजन 99 फीसदी शुद्ध होती है जबकि औद्योगिक ऑक्सीजन की शुद्धता 95 फीसदी से कम होती है। औद्योगिक ऑक्सीजन का प्रयोग मरीज के फेफड़ों के लिए घातक साबित हो सकता है। मरीजों को चिकित्सकीय देखरेख में केवल मेडिकल ऑक्सीजन का ही प्रयोग करना चाहिए।
-डॉ. संदीप टंडन, फिजीशियन, जिला अस्पताल

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