कोरोना का कहर: उत्तराखंड के साथ ही दिल्ली एनसीआर में भी भेल की ऑक्सीजन से चल रही सांसों की डोर
अब बढ़ी हुई मांग को देखते हुए भेल प्रशासन ने ऑक्सीजन प्लांटों से उत्पादित ऑक्सीजन की क्षमता बढ़ाकर ढाई गुना कर दी है ताकि अधिक से अधिक से कोरोना संक्रमितों के जीवन के लिए भेल की ऑक्सीजन संजीवनी बन सके।
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कोरोना संकट काल में देवदूत बनकर सामने आए भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के ऑक्सीजन प्लांट से देवभूमि के साथ ही कोरोना संक्रमण से जूझ रहे दिल्ली एनसीआर में भी कोरोना मरीजों की सांसों की डोर चल रही है। अब बढ़ी हुई मांग को देखते हुए भेल प्रशासन ने ऑक्सीजन प्लांटों से उत्पादित ऑक्सीजन की क्षमता बढ़ाकर ढाई गुना कर दी है ताकि अधिक से अधिक से कोरोना संक्रमितों के जीवन के लिए भेल की ऑक्सीजन संजीवनी बन सके।
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भारी मशीनरी और रक्षा उपकरण बनाने के लिए पहचान बनाने वाला भेल हरिद्वार देश को संकट काल से उबारने के लिए भी सहयोग करने से पीछे नहीं हट रहा है। शुरू में भेल प्रशासन ने अपने दोनों ऑक्सीजन प्लांटों में उत्पादित एक हजार घन मीटर ऑक्सीजन मेडिकल संस्थाओं को देने का निर्णय लिया था। ऑक्सीजन वितरण का लाइसेंस लेकर भेल ने 24 अप्रैल से ऑक्सीजन वितरण शुरू कर दिया था।
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पहले कुछ दिनों में प्लांट से 24 घंटे में छह घनमीटर वाले 12 सौ ऑक्सीजन सिलिंडर भरे जा रहे थे, लेकिन डिमांड बढ़ने पर अब प्रतिदिन तीन हजार ऑक्सीजन सिलिंडर प्लांट से भरे जा सकते हैं। रविवार को ही भेल से एक दिन में तीन हजार ऑक्सीजन सिलिंडर भरकर मेडिकल संस्थाओं को दिए गए। प्लांट से दिल्ली एनसीआर, मेरठ, गाजियाबाद में भी बढ़ी मात्रा में ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रकों से मेडिकल संस्थाओं के माध्यम से जा रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के आगरा, बुलंदशहर, बिजनौर, अलीगढ़, सहारनपुर के अस्पतालों की ओर से भी ऑक्सीजन मंगवाई जा रही है।
अब तक भर चुके 13 हजार ऑक्सीजन सिलिंडर
भेल प्रशासन की ओर से दोनों प्लांटों को 24 घंटे चलाया जा रहा है। कर्मचारियों को ड्यूटी के हिसाब से कोरोना संक्रमण की गाइडलाइन के अनुसार बुलाया जा रहा है। अब तक विभिन्न क्षेत्रों के अस्पतालों को छह घन मीटर वाले लगभग 13 हजार ऑक्सीजन सिलिंडर भरकर दिए जा चुके हैं। एक बार में कम से कम दस सिलिंडर दिए जा रहे हैं।
अब तक भर चुके 13 हजार ऑक्सीजन सिलिंडर
मेडिकल संस्थाओं की ओर से तो भेल से ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाए ही जा रहे हैं, लेकिन ऑक्सीजन के संकट को देखते हुए गाजियाबाद जिला प्रशासन ने भी भेल का सहयोग लिया है। गाजियाबाद जिला प्रशासन की ओर से नियमानुसार 500 ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाकर आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए मंगवाए गए हैं। ये सिलिंडर जरूरतमंदों को दिए जा रहे हैं।
सेना के अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की सप्लाई
भेल प्रशासन की ओर से उत्पादित ऑक्सीजन को सेना के अस्पतालों में भी ले जाया जा रहा है। आगरा और मेरठ के सैनिक अस्पताल में ऑक्सीजन के सिलिंडर ले जाए गए हैं। भेल के कार्यपालक निदेशक संजय गुलाटी ने बताया कि कोरोना काल में सैनिकों की सेवा करने का जो सौभाग्य प्राप्त हो रहा है, उस पर उन्हें गर्व है। ऑक्सीजन प्लांट में 200 कर्मचारी दिन-रात कार्य कर रहे हैं। भेल के अस्पताल को भी कोविड में तब्दील कर कोरोना संक्रमितों का उपचार किया जा रहा है।
दोनों ऑक्सीजन प्लांटों से उत्पादित ऑक्सीजन पहले हरिद्वार और उत्तराखंड को देना प्राथमिकता है। ऑक्सीजन देकर अधिक से अधिक कोरोना संक्रमितों की जान बचाई जा सके, बस दिन-रात इसी कोशिश में लगे हैं। अधिक से अधिक ऑक्सीजन तैयार करना उद्देश्य है।
-पीके श्रीवास्तव, नोडल एवं अपर महाप्रबंधक (मा.स) भेल, हरिद्वार