छह साल की उम्र में बिछुड़ गई मां के अचानक मिल जाने से दुर्लभ और क्या हो सकता है? हजारों किमी फासला तय करके देहरादून नारी निकेतन पहुंचे दुर्लभ पतिर ऐसे ही भाग्यशाली बेटे हैं।
16 साल बाद मां से मिला बेटा तो आंखों से बही 'ममता'
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16 साल पहले वह अपनी मां से बिछुड़ गए थे । मां भटक कर उत्तराखंड पहुंच गईं। आज 16 साल बाद जब सुभद्रा को ‘दुर्लभ’ दर्शन हुए तो दोनों की आंखें छलछला उठीं।
नारी निकेतन में सोमवार को माहौल अन्य दिनों से जुदा था। सुभद्रा सुबह से टकटकी लगाए गेट की ओर देख रही थी। कुछ दिन पहले से ही उसकी जुबां पर यही था कि ‘मुझे घर जाना है’। जैसे ही कोई गाड़ी अंदर आती, वह गेट की ओर दौड़ पड़ती। घर जाने की खुशी में उसने सुबह से खाना भी नहीं खाया था।
दोपहर ठीक 3.37 मिनट पर बेटा दुर्लभ अपनी मां को लेने के लिए पहुंचा। दोनों एक-दूसरे को दूर से देखते ही दौड़ पड़े। सुभद्रा-दुर्लभ गले लगकर रो पड़े। इसे देख वहां मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू निकल पड़े। बेटे ने अपने हाथ से मां को पानी पिलाया। फिर मिठाई खिलाई। दोनों के चेहरों पर खुशी साफ देखी जा सकती थी।
इस दौरान सचिव भूपेंद्र कौर औलख ने मां-बेटे को उपहार देकर विदा किया। गौरतलब है कि डेढ़ बरस पहले ‘अमर उजाला’ ने संवासिनियों के उत्पीड़न के खुलासे के बाद नारी निकेतन में चली सुधारों की बयार में बड़ी संख्या में संवासिनियों की घर वापसी हुई। इस कड़ी में विभाग वर्ष 2014 से नारी निकेतन में जिंदगी काट रही सुभद्रा को उसके परिवार से मिलाने में कामयाब रहा।