केदारनाथ धाम में अपना अस्तित्व खो चुके रामबाड़ा की आखिरी निशानी भी अब चार साल बाद खत्म हो चुकी है। वहीं अब वहां सिवाए पत्थरों के कुछ नहीं रह गया है।
आपदा के बाद से आज तक रामबाड़ा में स्मृति वन की स्थापना नहीं हो पाई है। चार वर्ष पूर्व यहां निशानी के तौर पर रोपा गया रुद्राक्ष का पौधा भी देखरेख नहीं होने से सूखकर नष्ट हो चुका है। पूरी तरह से उजड़े रामबाड़ा को शासन, प्रशासन भूल चुका है।
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rambada before kedarnath disaster
- फोटो : amarujala
16/17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा में तबाह हो चुके रामबाड़ा को बाबा केदार के भक्तों की यादों में रखने के लिए वर्ष 2014 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने यहां पर स्मृति वन की स्थापना की घोषणा की थी। तब, तत्कालीन केबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत व स्वामी चिदानंद जी महाराज ने रामबाड़ा में रुद्राक्ष का पौधा रोपा था।
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rambara
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इस स्थान पर रुद्राक्ष, देवदार, पीपल, बरगद सहित अन्य प्रजातियों के डेढ़ हजार पौधों का रोपण कर स्मृति वन तैयार करने की बात कही गई थी। तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने कहा था कि इस वन से बाबा केदार के भक्तों के दिलों में रामबाड़ा जिंदा रहेगा। लेकिन यहां स्मृति वन के नाम पर आज तक दूसरा पौधा नहीं रोपा गया।
वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती व केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, कुबेरनाथ पोस्ती, राहुल सेमवाल आदि का कहना है कि केदारनाथ यात्रा में रामबाड़ा सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव था। यहां पर केदारघाटी के हजारों लोगों को रोजगार मिलता था। वहीं, बाबा केदार के दर्शनों को पहुंचे श्रद्धालु अपना सुख-दुख साझा करते थे। लेकिन आपदा के बाद से इस स्थान को भुला दिया गया है। स्मृति वन स्थापना तो दूर शासन, प्रशासन द्वारा रामबाड़ा में सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं किए गए हैं।