राम रहीम को लेकर जब भी बातें सामने आई तब संत समाज में रोष ही रहा है। आज भी पत्रकार के मर्डर केस में कोर्ट ने राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यौन शोषण के मामले में जब गुरमीत राम रहीम को लेकर फैसला आया था तो बाबा रामदेव ने संतों को एक नसीहत दी थी जिसके बाद उनका ये बयान खूब चर्चा में रहा।
2017 में एक नदी अभियान रैली फॉर रिवर्स के कार्यक्रम में पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि योगपीठ की ओर से एक करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने एक ही दिन में साधू संतों के साथ मिलकर एक लाख पौधे रोपने का संकल्प लिया। कहा कि गृहस्थ लोग जब बच्चों को पाल सकते हैं तो कम से कम साधू पौधे तो पाल ही सकते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि पौधों को अगर पालोगे तो उनमें से कोई भी राम रहीम नहीं निकलेगा।
जब यौन शोषण के मामले में फैसले के बाद जब पत्रकारों ने बाबा रामदेव से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि, बाबाओं ने राम का नाम बदनाम कर दिया है। इससे हमारी धर्म और संस्कृति की भी बदनामी होती है। कहा कि, जहां देखों हर दो तीन साल में देश में बाबा कांड हो जा रहा है।
इसलिए ऐसे में जरूरत है कि आज जो बाबा शिखर पर हैं, उन्हें अपने आचरण का ध्यान रखना चाहिए। बाबा रामदेव ने अपने लिए कहा कि मैं भी एक संन्यासी हूं। संतों के लिए गेरुआ वस्त्र महज एक कपड़ा नहीं है। इससे लोगों की आस्था जुड़ी होती है।
वहीं यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद हरियाणा और पंजाब में भड़की हिंसा में समर्थन में सिरसा गए उत्तराखंड में धिमरी ब्लाक के चंद्रपाल की 25 अगस्त को पंचकूला में हुए उपद्रव के दौरान गोली लगने से मौत हो गई। डेरे के बुलावे पर दिनेशपुर के जंगल से सटे गांव से करीब 18 अनुयायी सिरसा गए थे।