लॉकडाउन के कारण अस्थि विसर्जन पर लगी रोक हटने के बाद हरकी पैड़ी पर करीब डेढ़ महीने से पसरा सन्नाटा टूट गया। पहले दिन चार लोग अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने पहुंचे। तीर्थ पुरोहितों ने ब्रह्मकुंड स्थित अस्थि प्रवाह घाट पर अस्थियों का विसर्जन कराया।
अस्थियों का विसर्जन करने के बाद विसर्जन करने वाले लोगों ने बहियों में अपने नाम भी दर्ज कराए। तीर्थ पुरोहित भी गंगा घाटों पर पहुंचे और मां गंगा की पूजा अर्चना की। मालूम हो कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और 23 मार्च को प्रदेश सरकार की ओर से लॉकडाउन करने के बाद से ही हरकी पैड़ी सहित गंगा घाटों पर गंगा आरती को छोड़कर सभी कर्मकांड बंद हो गए थे।
गंगा आरती में भी गिनती के पुरोहित ही शामिल हो पाते थे। अस्थियां विसर्जन नहीं होने पर तमाम राज्यों से शिकायतें आ रही थीं। राज्य की सीमा से ही ऐसे लोगों को वापस भेजा जा रहा था। इसके बाद गंगा सभा और पुरोहितों ने सरकार से अस्थि विसर्जन करने को छूट देने की मांग की थी। बृहस्पतिवार को कैबिनेट की बैठक में अस्थि विसर्जन पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया गया था।
शुक्रवार को हरकी पैड़ी के अलावा कनखल स्थित अस्थि प्रवाह घाट पर भी कई दिनों बाद कर्मकांड हुए। यहां भी दो परिवार अपने दिवंगत परिजन की अस्थियां प्रवाहित करने आए। गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि अस्थि विसर्जन के दौरान लॉकडाउन की सभी नियमों का पूरी तरह से पालन किया गया।
उन्होंने बताया कि अब देशभर से बड़ी संख्या में लोगों के फोन पुरोहितों के पास आ रहे हैं। लोग प्रतिबंध हटने और हरिद्वार आने के बारे में जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सब कुछ पहले की की तरह सामान्य हो जाएगा।