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केदारनाथ आपदा की 5वीं बरसी: 16-17 जून को क्यों आई थी तबाही, ये हैं चार धार्मिक कारण

Sun, 17 Jun 2018 09:13 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 17 Jun 2018 09:13 AM IST
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kedarnath flood 2013 fifth year resion of disaster
kedarnath dham after three years of disaster - फोटो : file photo

2013 में आई केदारनाथ की तबाही के बाद लोगों के मन में आज भी कई तरह के सवाल उठते हैं। केदारनाथ में पहले भी बारिश होती थी, नदियां उफनती थी और पहाड़ भी गिरते थे। लेकिन जैसा विनाश आज से ठीक पांच साल पहले हुआ वैसी तबाही केदारनाथ में पहले कभी नहीं हुई। प्रकृति की इस विनाश लीला को देखकर कुछ लोगों की आस्था की नींव हिल गई। जबकि कुछ आस्थावान ऐसे भी हैं जिनकी आस्था की नींव और मजबूत हो गयी है। ऐसे ही आस्थावान श्रद्धालुओं की नजर में केदारनाथ पर आई आपदा के पीछे कई धार्मिक कारण हैं।


 

kedarnath flood 2013 fifth year resion of disaster
dhari devi temple

जब केदारनाथ में आपदा आई थी उस वक्त धारी माता की नाराजगी, सोशल मीडिया में इसके कारणों पर जो चर्चा चल रही थी उसके अनुसार इस विनाश का सबसे पहला और बड़ा कारण धारी माता का विस्थापन माना जा रहा था। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भरती ने भी एक सम्मेलन में इस बात को स्वीकार था कि अगर धारी माता का मंदिर विस्थापित नहीं किया जाता तो केदारनाथ में प्रलय नहीं आती। धारी देवी का मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर से 15 किलोमीटर दूर कालियासुर नामक स्थान में विराजमान था। धारी देवी को काली का रूप माना जाता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार उत्तराखंड के 26 शक्तिपीठों में धारी माता भी एक हैं। बांध निर्माण के लिए 16 जून 2013 की शाम में 6 बजे शाम में धारी देवी की मूर्ति को यहां से विस्थापित कर दिया गया। इसके ठीक दो घंटे के बाद केदारघाटी में तबाही की शुरुआत हो गयी।

kedarnath flood 2013 fifth year resion of disaster
Gangotri Dham - फोटो : amarujala.

आमतौर पर चार धाम की यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने से होती है। लेकिन साल 2013 में 12 मई को दोपहर बाद अक्षय तृतीया शुरू हो चुकी थी और 13 तारीख को 12 बजकर 24 मिनट तक अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त था। लेकिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट को इस शुभ मुहूर्त के बीत जाने के बाद खोला गया। खास बात ये हुई कि जिस मुहूर्त में यात्रा शुरू हुई वह पितृ पूजन मुहूर्त था। इस मुहूर्त में देवी-देवता की पूजा एवं कोई भी शुभ काम वर्जित माना जाता है। इसलिए अशुभ मुहूर्त को भी विनाश का कारण माना जाता है। 

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kedarnath flood 2013 fifth year resion of disaster
char dham yatra

बहुत से पुरोहित और संत ऐसा मानते हैं कि लोगों में तीर्थों के प्रति आस्था की कमी के चलते विनाश हुआ। यहां लोग तीर्थ करने के साथ-साथ छुट्टियां बिताने और पिकनिक मनाने के लिए आने लगे थे। ऐसे लोगों में भक्ति कम दिखावा ज्यादा होता है। धनवान और रसूखदार व्यक्तियों के लिए तीर्थस्थानों पर विशेष पूजा और दर्शन की व्यवस्था है, जबकि सामन्य लोग लंबी कतार में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतजार करते रहते हैं। तीर्थों में हो रहे इस भेद-भाव से केदारनाथ धाम भी वंचित नहीं रहा।

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kedarnath flood 2013 fifth year resion of disaster
flood, heavy rain, mandakini, alaknanda, uttarakhand news, weather alert - फोटो : amar ujala

मंदाकिनी, अलकनंदा और भागीरथी मिलकर गंगा बनती है। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गंगा अपने मैले होते स्वरूप और अपमान के चलते इतने रौद्र रूप में आ गई इसलिए 2013 में उत्तराखंड  को आपदा का दंश झेलना पड़ा। कहा जाता है कि गंगा धरती पर आना ही नहीं चाहती थी लेकिन भगवान शिव के दबाव में आकर उन्हें धरती पर उतरना पड़ा। भगवान शिव ने गंगा की मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखने का विश्वास दिलाया था। लेकिन बांध बनाकर और गंदगी करके हो रहा लगातार अपमान गंगा को सहन नहीं हो पाया।

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