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Haridawar Mahakumbh Mela 2021: अनेक तीर्थों से भरा हुआ है हरिद्वार, पढ़ें एक अनोखा पौराणिक इतिहास...

Mon, 04 Jan 2021 01:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 04 Jan 2021 01:42 PM IST
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haridwar MahaKumbh Mela 2021 in Haridwar News: many holy places in haridwar know this mythology story
हरिद्वार में गंगा

हरिद्वार का कुंभ क्षेत्र हरकी पैड़ी के साथ साथ अनेक तीर्थों से भरा हुआ है। तीर्थ के भीतर तीर्थ का दर्शन कर लाखों यात्री आनंदित हो उठते हैं। दत्तात्रेय की तप स्थली कुशावर्त ऐसा ही तीर्थ है। यहां ऋषि दत्तात्रेय ने ही तपस्या की, बल्कि मैत्रेय ने विदुर को श्रीमद्भागवत इसी कुशावर्त पर आकर सुनाई थी।



 

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हरिद्वार में गंगा

राजा भगीरथ शिव की जटाओं से नि:सृत गंगा नदी को हिमालय से लेकर सागर तट स्थित कपिल मुनि के आश्रम को रवाना हुए। कपिल मुनि के श्राप से इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर के साठ हजार पुत्र भस्म हो गए थे। राजा सगर की चार पीढ़ी गंगा नदी को लाने में असफल हुई, जबकि भगीरथ सफल हुए।

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हरिद्वार में गंगा

भगीरथ जब हरकी पैड़ी से होते हुए आगे बढ़े तो रास्ते में दत्तात्रेय ऋषि तपस्या कर रहे थे। शंख बजाते हुए भगीरथ आगे आगे, गंगा नदी पीछे पीछे। गंगा नदी  के वेग में ऋषि के दंड कमंडल बह निकले। साथ ही तपस्या में लीन ऋषि दत्तात्रेय के ऊपर भी गंगा नदी बहने लगी। ऋषि की तपस्या भंग हुई। उन्होंने अपने तपो बल से गंगा नदी को आगे बढ़ने से रोक दिया।

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हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए भीड़

आगे न बढ़ पाने के कारण गंगा नदी आवर्तमय होकर वहीं गोल गोल बहने लगी। यह देखकर भगीरथ और गंगा नदी दोनों ने दत्तात्रेय से क्षमा मांगी, उनके आसान और दंड कमंडल लौटाए । मुनि की आरती उतारी। तब दत्तात्रेय का क्रोध शांत हुआ।
 

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श्रद्धालु पितरों का श्राद्ध तर्पण और पितृ कर्मकांड करने आते हैं

उन्होंने गंगा नदी को कालजयी होने का आशीर्वाद दिया। कुशा का आसन बहने के कारण इस स्थल का नाम कुशावर्त पड़ा। आज भी कुशावर्त आकर गंगा नदी वापस लौटती हैं, आवर्तमय बहती हैं। इस कुशावर्त तीर्थ पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण और पितृ कर्मकांड करने आते हैं। 

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