हरिद्वार के बैरागी कैंप क्षेत्र की करीब 50 झोपड़ियों में आग लगी तो आशियानों को बचाने के लिए महिलाएं और बच्चे हैंडपंपों की ओर बाल्टियां लेकर दौड़ लगा रहे थे। घटना के वक्त घर पर महिलाएं और बच्चे ही थे। पुरुष मजदूरी करने गए थे। महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चे बाल्टियों से पानी भर भरकर आग बुझाने की कोशिश में जूझते रहे, लेकिन तेज हवा से आग भड़कती चली गई।
बैरागी कैंप के बाजरीवाला की झुग्गी बस्ती में चारों तरफ चीख-पुकार की सुनाई दे रही थी। हर कोई अपनी झोपड़ी से बाहर निकलकर एक-दूसरे की मदद करता नजर आया। जिसे जहां पर मौका मिला, उसने आग बुझाने का प्रयास किया।
हरिद्वार: कुंभ मेला क्षेत्र की करीब 50 झोपड़ियों में लगी भीषण आग, मची चीख-पुकार, तस्वीरें...
कई महिलाएं और युवतियां हैंडपंपों पर डटी रहीं। कई महिलाएं बालू डालकर आग बुझाने की कोशिश में जुटी थीं। वहीं आग लगने की सूचना पर काम पर गए कुछ पुरुष भी लौट आए। उनके लौटने तक उनके आशियाने राख हो चुके थे।
वहीं, झोपड़ियों में आग लगने से कई लोगों के सपने जलकर राख हो गए। किसी ने अपनी बेटी की शादी के लिए दहेज व बेटे की शादी के लिए सामान इकट्ठा किया हुआ तो किसी को अपनी बेटी की शादी के बाद उसकी ससुराल में पहली होली के लिए उपहार भेजना था।
2 of 5
हरिद्वार में झोपड़ियों में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
बाजरीवाला बस्ती की मीरा भारती ने बताया कि 27 मई को उनके बेटे की शादी थी। इसके लिए उन्होंने सभी सामान इकट्ठा किया था। इसमें दुल्हन के कपड़े, आभूषण व मेहमानों को दिए जाने वाले कपड़े थे। ऊषा ने बताया कि उनके बेटे मनोज की शादी अगले महीने है, बेटी राधिका की सगाई हो चुकी है।
3 of 5
हरिद्वार में झोपड़ियों में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
पुत्र वधू के शादी के जोड़े और बेटी की शादी का भी सामान इकट्ठा किया था जो जल गया। राधिका ने बताया कि वह सगाई के बाद अब अपनी शादी की तैयारियों में जुटी हुई थी। ससुराल में ले जाने वाली कई पेंटिंग व अन्य सामान तैयार किया था।
4 of 5
कुंभ मेला क्षेत्र की झोपड़ियों में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
सारा सामान जलकर राख हो गया। सुखबीर सिंह ने बताया कि उनकी बेटी की कुछ महीने पहले ही शादी हुई थी। बेटी की पहली होली पर उसके ससुराल में उपहार भेजे जाते हैं। जिसे उनकी पत्नी ने इकट्ठा किया था। वह सब जलकर राख हो गया है।
5 of 5
हरिद्वार में झोपड़ियों में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
जिस बस्ती में आग लगी उसमें करीब 300 से अधिक झोपड़ियां हैं। करीब 15 साल से लोग इनमें रहते हैं। ज्यादातर मजदूरी कर परिवार पालते हैं। हवा चलने से आग की लपटें तेजी से बस्ती में फैल गईं और बड़ी संख्या में झोपड़ियों को गिरफ्त में ले लिया।