मीठे रीठे के लिए दुनियाभर में मशहूर श्रीरीठा साहिब गुरुद्वारे में अब भव्यता की मिठास भी घुलेगी। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर जल्द ही सोने का दरवाजा इस पवित्र गुरुद्वारे की शान बनेगा। दरवाजे को लगाने के लिए कारीगर यहां पहुंच गए हैं।
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह देवभूमि में भी है 'स्वर्ण मंदिर'
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gold accessories in reetha sahib gurudwara uttarakhand
- फोटो : amar ujala
सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव के चरण स्पर्श होने से अध्यात्म की अविरल गंगा बहाने वाले इस गुरुद्वारे में 20 जून को यह दरवाजा लग जाएगा। दुनियाभर में फैले श्रद्धालुओं ने मिलकर इस दरवाजे को बनवाया है। नानकमत्ता गुरुद्वारे के बाबा तरसेम सिंह ने बताया कि सोने का यह दरवाजा सबसे पवित्र स्थल दरबारा साहिब में लगेगा।
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह देवभूमि में भी है 'स्वर्ण मंदिर'
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दरवाजे का भीतरी हिस्सा तांबे का है, जबकि बाहर से सोने की पॉलिश की गई है। चंपावत गुरुद्वारे के प्रबंधक बाबा श्याम सिंह ने बताया कि सात फीट लंबाई और छह फीट चौड़ाई वाले इस दरवाजे के लिए श्रद्धालुओं से सोना एकत्र करने से लेकर बनाने तक में करीब एक साल का समय लगा है। दरवाजे की कीमत 1.50 करोड़ रुपये से अधिक की है।
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह देवभूमि में भी है 'स्वर्ण मंदिर'
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पांच किलोग्राम सोने का यह दरवाजा कनाडा, केन्या, ब्रिटेन के अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि के सैकड़ों भक्तों के सहयोग से बनाया गया है। आस्था के अलावा गुरुद्वारे को खूबसूरत बनाने के मकसद से इस स्वर्णिम दरवाजे को भेंट किया गया है। इस दरवाजे को लगाने के लिए कारीगरों की टीम यहां पहुंच चुकी है।
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह देवभूमि में भी है 'स्वर्ण मंदिर'
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श्रीरीठा साहिब के गुरुद्वारे में इससे पूर्व चार पवित्र सामग्री में सोने का उपयोग किया जा चुका है। गुरुद्वारे के गुंबद में करीब चार साल पहले सोने का कलश लगाया गया है। इस कलश में दो किलोग्राम सोना लगा है। इसी तरह गुरुद्वारे में सोने की पालकी भी है। इसमें सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब को रखा जाता है। श्रीरीठा साहिब की सोने की तस्वीर, जिसमें गुरुनानक देव, उनके दो शिष्य मरदाना व बालाजी, रीठा के पेड़ की तस्वीर है। गुरुद्वारे के प्रतीक चिन्ह निशान साहिब का खंभे में भी सोना लग चुका है। राष्ट्रपति रहे ज्ञानी जैल सिंह देश के गृह मंत्री के रूप में 1981 में श्रीरीठा साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेक चुके हैं, जबकि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2002 में राज्यपाल रहते सुरजीत सिंह बरनाला ने गुरुद्वारे में शीश नवाए।