केदारनाथ आपदा को तीन साल बीत गए हैं, लेकिन विज्ञान से दूर लोग जून 2013 में आई आपदा के पीछे धार्मिक कारण मानते हैं। आपदा के दौरान भी सोशल मीडिया पर इन कारणों पर खूब चर्चा हुई।
केदारनाथ में उस रात क्यों आई तबाही? ये हैं चार धार्मिक कारण
आपदा के दौरान सोशल मीडिया में इस विनाश का सबसे पहला और बड़ा कारण धारी माता का विस्थापन माना गया। अभी भी लोग इस बात पर विश्वास करते हैं। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भरती ने भी एक सम्मेलन में इस बात को स्वीकार था कि अगर धारी माता का मंदिर विस्थापित नहीं किया जाता तो केदारनाथ में प्रलय नहीं आती। धारी देवी का मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर से 15 किलोमीटर दूर कालियासुर नामक स्थान में विराजमान था।
केदारनाथ में उस रात क्यों आई तबाही? ये हैं चार धार्मिक कारण
धारी देवी को काली का रूप माना जाता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार उत्तराखंड के 26 शक्तिपीठों में धारी माता भी एक हैं। बांध निर्माण के लिए 16 जून की शाम में 6 बजे शाम में धारी देवी की मूर्ति को यहां से विस्थापित कर दिया गया। इसके ठीक दो घंटे के बाद केदारघाटी में तबाही की शुरूआत हो गयी।
केदारनाथ में उस रात क्यों आई तबाही? ये हैं चार धार्मिक कारण
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केदारनाथ धाम
- फोटो : अमरउजाला
आमतौर पर चार धार की यात्रा की शुरूआत अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने से होती है। लेकिन साल 2013 में 12 मई को दोपहर बाद अक्षय तृतीया शुरू हो चुकी थी और 13 तारीख को 12 बजकर 24 मिनट तक अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त था। लेकिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट को इस शुभ मुहूर्त के बीत जाने के बाद खोला गया।
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Portals of kedarnath open
खास बात ये हुई कि जिस मुहूर्त में यात्रा शुरू हुई वह पितृ पूजन मुहूर्त था। इस मुहूर्त में देवी-देवता की पूजा एवं कोई भी शुभ काम वर्जित माना जाता है। इसलिए अशुभ मुहूर्त को भी विनाश का कारण माना जा रहा है।