उत्तराखंड की राजधानी देहरादून भारत के उन 30 शहरों में से एक है जहां चेशायर होम स्थापित हैं। चेशायर होम्स वैश्विक हिंसा के पश्चाताप घर की तरह हैं, जिनमें मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों की सेवा की जाती है। दून स्कूल से कुछ ही दूरी पर स्थित चेशायर होम में दिव्यांगों का अनूठा परिवार रहता है। कोई पूरी तरह समझ नहीं पाता, कोई चल नहीं पाता, कोई बोल नहीं पाता तो कोई ठीक से देख नहीं पाता। किसी के हाथ सलामत नहीं हैं। लेकिन प्यार और सेवा का अदृश्य धागा इन दिव्यांगों को एक-दूसरे से जोड़े रखता है। चेशायर होम बिना किसी सरकारी मदद के समाज के लिए कुछ कर गुजरने के लिए संकल्पित लोगों की सेवा भाव से ही चलता है। कई लोग गुप्त दानी हैं। अपने नाम का जिक्र तक पसंद नहीं करते। लेकिन आप सामने आकर भी इस संस्था को मदद करना चाहते हैं तो राशन, कपड़े, रुपये से कर सकते हैं।
2 of 5
चेशायर होम्स
- फोटो : अमर उजाला
लिओनार्ड चेशायर रॉयल ब्रिटिश एयर फोर्स में ग्रुप कैप्टन थे। उनकी गिनती अपने वक्त के सबसे जांबाज पायलटों में होती थी। उन्हें विक्टोरिया क्रास जैसा सर्वोच्च वीरता मेडल भी मिला था। चेशायर उस टीम में शामिल थे, जिसने जापान के नागासाकी शहर में गिराए गए परमाणु बम की त्रासदी देखी थी। यह भी विडंबना ही है कि अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के प्रशंसक आइंस्टीन के ईजाद किए गए परमाणु बम ने अनगिनत लोगों की जान ही नहीं ली थी, बल्कि विकलांग भी बनाया था।
3 of 5
चेशायर होम्स
- फोटो : अमर उजाला
इस पीड़ा से विकल होकर चेशायर ने न सिर्फ एयर फोर्स से इस्तीफा दे दिया, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी दिव्यांग और दीन-दुखियों की सेवा में लगा दी। दुनिया भर में उनकी संस्था ने चेशायर होम्स खोले हैं। इनकी संख्या लगभग तीन सौ है। भारत में इनकी संख्या 30 है।
4 of 5
चेशायर होम्स
- फोटो : अमर उजाला
दून स्कूल के पास 16 प्रीतम रोड पर स्थित चेशायर होम्स एक महलनुमा भवन में 1956 से स्थापित है। इस भवन का उद्घाटन पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1956 में किया था। यह भवन नाभा के पूर्व महाराज ने दान में दिया था। विस्तृत हरियाले लॉन और खूबसूरत पेड़-पौधों वाला चेशायर होम खूबसूरत इमारत है। मौजूदा वक्त में यहां 22 दिव्यांग पुरुष और 18 महिलाएं रहती हैं। यहां रहने वाले लोग मानसिक रूप से बहुत विकसित नहीं हैं। लेकिन प्यार की भाषा खूब समझते हैं।
5 of 5
चेशायर होम्स
- फोटो : अमर उजाला
वे जानते हैं कि यहां आने वाला उनके लिए कोई न कोई तोहफा ले आता है। बड़ी मासूमियत से वे मुस्कुरा कर उसे हाथ जोड़ कर नमस्ते करते हैं। यहां की अलग दुनिया देखकर करुणा अपने आप उपजती है। सबके सोने के लिए फाइबर के बेड हैं। चेशायर होम देहरादून की संचालिका ममता गुप्ता का दावा है कि उनके यहां साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है। यहां रहने वाले दिव्यांगों को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन दिया जाता है।