बुधवार की शाम आई आंधी-बारिश से पूरे कुमाऊं में व्यापक नुकसान हुआ है। आंधी से कुमाऊं में दो और मौत हो गई। इसके साथ ही यहां मरने वालों की संख्या पांच हो गई है। बुधवार को कुमाऊं में दो लोगों की मौत हुई थी। इस आंधी से सबसे अधिक नुकसान ऊर्जा निगम को हुआ है। समूचे कुमाऊं में रातभर बिजली गुल रही। इससे लोगों को पेयजल की समस्या से दो चार होना पड़ा।
आंधी की आफत से उत्तराखंड में मची तबाही, अब तक पांच की मौत, कई घर जलकर खाक, तस्वीरें...
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बुधवार को हल्द्वानी में अंधड़ से गिरे पेड़ की चपेट आकर घायल सोनिया (24) पुत्री स्वर्गीय धरम राम की बृहस्पतिवार को मुखानी स्थित निजी अस्पताल में मौत हो गई। रामबाग मानपुर उत्तर में बुधवार की रात दीवार गिरने से घायल बुजुर्ग धर्मपाल (85) की भी एसटीएच में उपचार के दौरान मौत हो गई। बुधवार शाम घर के पास भरभराकर गिरी एक दीवार की चपेट में आने से वह घायल हो गए थे। उधर, ऊधमसिंह नगर के बग्घा चौवन गांव में आंधी से भड़की आग में गांव निवासी पीटर (16) की मौत हो गई, जबकि उसके पिता सुरेश कुमार बुरी तरह से झुलस गया। इसके अलावा, गांव में18 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। दो परिवारों की आठ बकरियों की भी जलकर मौत हो गई, जबकि कई मवेशी झुलस गए।
मौके पर पहुंचे एसडीएम, तहसीलदार ने मौका मुआयना किया। समाचार लिखे जाने तक नुकसान के आकलन का कार्य जारी था। हालांकि तहसीलदार ने इन 18 परिवारों समेत कुल 25 परिवारों को 3800-3800 रुपये की अहेतुक राशि वितरित की है। इनमें बरी अंजनियां के दो परिवार और मेहरबान नगर में शादी के दौरान लगी आग के पीड़ित पांच परिवार शामिल हैं। उधर, सितारगंज और नानकमत्ता के छह गांवों में भी आंधी से भड़की आग में कई घर जलकर राख हो गए। आंधी तूफान से हल्द्वानी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति ठप रही। 71 में से 18 ट्यूबवेल बिजली न मिलने से चालू नहीं हो सके। यहां आंधी तूफान से आम और लीची की फसल को 40 फीसदी तक नुकसान का अनुमान है। अंधड़ बिजली विभाग को 15 लाख से अधिक की चपत लगी है। शहर और ग्रामीणों क्षेत्रों में 70 से अधिक बिजली के पोल धराशायी हुए हैं।
अल्मोड़ा में ही निगम को 25 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। नगर क्षेत्र के अलावा भैंसियाछाना-सेराघाट, लमगड़ा, धौलादेवी, सोमेश्वर, मनान और जैंती में करीब 11 केवी की ढाई किमी लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। 15 ट्रांसफार्मर फुंक गए और 20 से 25 पोल भी टूट गए। हालांकि, बृहस्पतिवार दोपहर तक कुछ जगहों पर विद्युत आपूर्ति सुचारु कर दी गई थी, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र भैंसियाछाना, धौलादेवी में एक दो दिन तक विद्युत आपूर्ति सुचारु होने की उम्मीद नहीं है। धौलछीना, बाड़ेछीना मोटर मार्ग में सुपई बैंड के पास चीड़ का पेड़ गिर जाने से सड़क के दोनों तरफ वाहनों का जाम लग गया। वहीं, बिजली न होने से अस्पतालों में पहुंचे मरीजों को भी परेशान होना पड़ा। इस दौरान एक्सरे, अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो सके।
वहीं, गरुड़ (बागेश्वर) के लाहुरघाटी, गोमती घाटी में ओलावृष्टि, अंधड़, तेज बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को भारी क्षति पहुंची है। गोमती, लाहुरघाटी के सैकड़ों फलदार, चीड़ के सैकड़ों पेड़ टूट गए हैं। उधर, गोमती घाटी में बुधवार शाम हुई तेज बारिश से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ गया। ऐसे में बैजनाथ कृत्रिम झील में खतरे के निशान से ऊपर पानी चढ़ते ही सायरन बज गया। इसे सुनकर बैजनाथ, गागरीगोल क्षेत्र के लोग सचेत हो गए। सिंचाई कर्मियों ने गेट खोलकर झील का पानी खाली किया। अंधड़ और बारिश ने चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट क्षेत्र में व्यापक तबाही मचाई। कई जगहों पर पेड़ गिर गए तो कहीं मकानों की छतें उड़ गई। पूल्ड हाउस रोड में चीड़ का पेड गिरने से कई घंटों तक जाम लगा रहा। इन क्षेत्रों में 16 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। बृहस्पतिवार को पूर्वान्ह 11 बजे बाद बिजली आपूर्ति सुचारु हो पाई।