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Dehradun News: 32 साल पहले बिकी भूमि का दोबारा हुआ सौदा अवैध, कोर्ट ने खारिज की अपील
Tue, 25 Aug 2026 12:42 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Tue, 25 Aug 2026 12:42 AM IST
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अपर जिला न्यायाधीश नंदन सिंह की अदालत ने जमीन की दोहरी बिक्री से जुड़े सिविल मामले में डाकरा (देहरादून) निवासी सरिता देवी और अजय कुमार की अपील को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने संपत्ति अंतरण अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए निचली अदालत के 31 अगस्त 2018 के फैसले को बरकरार रखा है और प्रेमनगर के पंडितवाड़ी निवासी राजकुमार शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया।
प्रकरण खसरा संख्या 383 की 1.04 एकड़ भूमि के स्वामित्व से जुड़ा है। अदालत में सरिता देवी और अजय कुमार ने दावा किया था कि उन्होंने यह जमीन 26 मार्च 2001 को जयप्रकाश नामक व्यक्ति से खरीदी थी। उनका आरोप था कि राजकुमार शर्मा उनकी इस भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके विपरीत, बचाव पक्ष के राजकुमार शर्मा ने साक्ष्यों के साथ अदालत को बताया कि उन्होंने यह जमीन चार जनवरी 2002 को बाबूलाल से खरीदी थी। वहीं, बाबूलाल ने इस भूमि को 22 अप्रैल 1969 को ही रजिस्ट्री के माध्यम से जयप्रकाश से खरीद लिया था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और राजस्व अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि मूल स्वामी जयप्रकाश ने वर्ष 1969 में ही जमीन बाबूलाल को बेच दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1969 की रजिस्ट्री के बाद विवादित भूमि पर जयप्रकाश का स्वामित्व पूरी तरह समाप्त हो गया था और राजस्व अभिलेखों में भी बाबूलाल का नाम दर्ज हो चुका था।
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ऐसे में, वर्ष 2001 में जयप्रकाश को उसी जमीन को सरिता देवी और अजय कुमार को बेचने का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं था। इन तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर अदालत ने राजकुमार शर्मा को विवादित भूमि का वैध स्वामी मानते हुए अपीलकर्ताओं का दावा खारिज कर दिया।
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प्रकरण खसरा संख्या 383 की 1.04 एकड़ भूमि के स्वामित्व से जुड़ा है। अदालत में सरिता देवी और अजय कुमार ने दावा किया था कि उन्होंने यह जमीन 26 मार्च 2001 को जयप्रकाश नामक व्यक्ति से खरीदी थी। उनका आरोप था कि राजकुमार शर्मा उनकी इस भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके विपरीत, बचाव पक्ष के राजकुमार शर्मा ने साक्ष्यों के साथ अदालत को बताया कि उन्होंने यह जमीन चार जनवरी 2002 को बाबूलाल से खरीदी थी। वहीं, बाबूलाल ने इस भूमि को 22 अप्रैल 1969 को ही रजिस्ट्री के माध्यम से जयप्रकाश से खरीद लिया था।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और राजस्व अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि मूल स्वामी जयप्रकाश ने वर्ष 1969 में ही जमीन बाबूलाल को बेच दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि 1969 की रजिस्ट्री के बाद विवादित भूमि पर जयप्रकाश का स्वामित्व पूरी तरह समाप्त हो गया था और राजस्व अभिलेखों में भी बाबूलाल का नाम दर्ज हो चुका था।
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ऐसे में, वर्ष 2001 में जयप्रकाश को उसी जमीन को सरिता देवी और अजय कुमार को बेचने का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं था। इन तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर अदालत ने राजकुमार शर्मा को विवादित भूमि का वैध स्वामी मानते हुए अपीलकर्ताओं का दावा खारिज कर दिया।