भारतीय क्रिकेट इतिहास में आज का दिन बेहद खास माना जाता है। आज से ठीक 35 साल पहले यानी 25 जून 1983 को भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। कपिल देव की अगुवाई वाली उस टीम ने लगातार 2 बार विश्व कप जीत चुकी वेस्टइंडीज को शिकस्त दी थी।
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया महज 183 रन पर ऑलआउट हो गई थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अब भारतीय टीम यह खिताबी मुकाबला जीत पाएगी, लेकिन गेंदबाजों ने कमाल करते हुए दिग्गज बल्लेबाजों से लैस वेस्टइंडीज टीम को महज 140 रन पर समेटते हुए अपना पहला विश्व कप जीता। आइए एक नजर डालते हैं 1983 वर्ल्ड कप फाइनल से जुड़ी उन बातों पर, जिसे आप शायद ही जानते होंगे।
सफेद कपड़ों में खेले गए 1983 विश्व कप के मैच 60 ओवर्स के थे। बाद में क्रिकेट का स्वरूप बदला, इस तरह भारत एकमात्र ऐसी टीम बन गई, जिसने जिसने 60ओवर, 50 ओवर और टी-20 विश्व कप जीता है। याद हो कि 2011 विश्व कप में मुकाबले 50 ओवर के थे, 2007 में भारत ने पहला टी-20 विश्व कप जीत कर ये अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया।
1983 फाइनल मैच में कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक नहीं लगा सका था। इस मैच के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर कृष्माचारी श्रीकांत थे जिन्होंने 38 रनों की अहम पारी खेली थी। इस भारतीय सलामी बल्लेबाज ने फाइनल में 38 रन की अपनी पारी में 7 चौके और 1 छक्का भी जड़ा था।
लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मुकाबले में हार के बावजूद वेस्टइंडीज दिग्गज विवियन रिचर्ड्स सबसे आगे रहे। उन्होंने 117.85 के स्ट्राइक रेट से 28 गेंदों में 33 रन बनाए थे। यह इस मैच का सर्वाधिक स्ट्राइक रेट था।