जयपुर में जीका वायरस ने कहर बरपा रखा है। अब तक 50 मरीज इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। अच्छी बात यह है कि अब तक इस वायरस का फैलाव नहीं हुआ है। इसके बावजूद चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। जयपुर से आकर शहर के होटलों में ठहरने वालों और अस्पतालों में आने वाले मरीजों पर सर्विलांस के जरिए निगरानी की जा रही है।
जीका वायरस अलर्ट: जयपुर से आने वाले लोगों पर खास नजर, जानें लक्षण और कैसे करें बचाव
होटल व अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि यदि जयपुर से कोई व्यक्ति आता है तो उसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को मुहैया करवाया जाए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दावा किया गया है कि जब से जीका वायरस के बारे में अलर्ट जारी किया गया है, तभी से निगरानी की जा रही है। अब तक चंडीगढ़ में जीका का कोई मरीज नहीं आया है।
लोगों को मच्छरों की बाइट से बचना होगा। यह वायरस भी एडीज मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर के काटने से डेंगू और चिकनगुनिया भी होता है। यह मच्छर दिन में ही काटता है। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा है कि यदि हो सके तो संक्रमित एरिया में न जाए। यदि जाते हैं तो मच्छरों से बचना होगा।
ऐसे होगी जांच
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के सीनियर डाक्टर ने बताया कि जीका वायरस के लक्षण पूरी तरह से डेंगू से मिलते-जुलते हैं। यदि कोई संदिग्ध पेशेंट आता है तो उसकी पहले डेंगू और चिकनगुनिया की जांच की जाएगी। यदि रिपोर्ट निगेटिव आएगी तो जीका की जांच होगी। ब्लड की निगेटिव रिपोर्ट आने पर यूरिन का भी सैंपल लिया जाएगा। जीका की जांच पीजीआई में होती है। जीका वायरस के मुख्य लक्षण तो थकान, बुखार, लाल आंखें, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और शरीर पर लाल चकत्ते जैसे होते हैं।
वीकली आती है रिपोर्ट
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक उनके पास मेडिकल कालेज से एक वीकली रिपोर्ट आती है, जिसमें नवजात के वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन के बारे में जानकारी होती है। इससे पता चल जाता है कि प्रेग्नेंट महिला को इंफेक्शन हुआ है या नहीं। इस वायरस का अटैक प्रेग्नेंट महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी होता है। इंफेक्शन से बच्चे के सिर का विकास रुक सकता है और वर्टिकली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन भी फैल सकता है।
जीका वायरस से बचने के लिए क्या करें
जीका वायरस को फैलाने वाले मच्छर से बचने के लिए वही उपाय है, जो आप डेंगू से बचने के लिए करते आए हैं। जैसे मच्छरदानी का प्रयोग, पानी को ठहरने नहीं देना। आसपास की साफ-सफाई। मच्छर वाले एरिया में पूरे कपड़े पहनना।