एक पहलवान, जो मंच पर सीएम से भिड़ गए थे। जुनून ऐसा है कि वर्ल्ड चैम्पियनशिप में हार गए, सपना अधूरा रह गया, फिर भी दो ऐसे रिकॉर्ड बनाए कि सब देखते ही रह गए। जानिए, उनके बारे में सब कुछ...
हम बात कर रहे हैं, इंटरनेशनल रेसलर बजरंग पूनिया की, जिनका पहली बार विश्व कुश्ती चैंपियनशिप खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया। साथ ही एक सत्र में तीन बड़े खिताब जीतने का सपना भी टूट गया अधूरा रह गया। भारतीय पहलवान को विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जापान के ताकुटो ओटोगुरो के हाथों 9-16 की शिकस्त झेलनी पड़ी। गोल्ड मेडल का सपना टूटा और बजरंग को सिल्वर से संतोष करना पड़ा।
हंगरी के बुडापेस्ट में 65 किमी वर्ग में 24 वर्षीय बजरंग को 19 वर्षीय ओटोगुरो से शिकस्त झेलनी पड़ी। वहीं जापानी पहलवान ओटोगुरो ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले जापान के सबसे कम उम्र के पहलवान बने। वहीं बजरंग पूनिया भले ही गोल्ड मेडल चूक गए, लेकिन उन्होंने अपने नाम एक खास उपलब्धि दर्ज करा ली है। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए हैं।
इससे पहले उन्होंने 2013 में फ्रीस्टाइल कुश्ती के 60 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था। विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक सिर्फ दोहरे ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार ने ही जीता है, जिन्होंने 2010 में मास्को में 66 किलो वर्ग में यह कमाल किया था। वहीं अगर यह खिताबी मुकाबला छोड़ दिया जाए तो ओलिंपक मेडलिस्ट पहलवान योगेश्वर दत्त को फॉलो करने वाले इस युवा पहलवान पूनिया के लिए यह साल अब तक जबरदस्त रहा है।
स्टार पहलवान बजरंग पूनिया का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के खुदान गांव में हुआ। सात साल की उम्र से ही पूनिया कुश्ती के दांव पेच सीखने लगे थे। कुश्ती के लिए बजरंग को उनके पिता ने काफी प्रोत्साहित किया। बजरंग पूनिया के भाई का नाम हरेंद्र सिंह पू्निया है। साल 2015 में उनका परिवार खेल प्रधिकरण के क्षेत्रीय केंद्र में भाग लेने के लिए सोनीपत चला गया और यहीं रहने लगा। बजरंग पूनिया मौजूदा समय में भारतीय रेल में टीटीई के पद पर तैनात हैं।