‘मैं दो साल बाद अपने चांद का दीदार कर रहीं हूं। पहले सर्जिकल स्ट्राइक और उसके बाद कोरोना ने मुझे अपने पति से दूर कर दिया। मैं मायके में बैठकर ससुराल आने के दिन गिन रही थी। फोन पर पति से बात तो होती थी लेकिन मिल न पाने का मलाल होता था। कुछ दिन पहले इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास ने खत भेजकर मुझे ससुराल जाने की अनुमति दी। जब ये बात मैंने अपने पति को बताई तो दोनों की आंखें भर आईं।’
दो साल बाद ससुराल वापसी : पाकिस्तान की बेटी व भारत की बहू लौटी, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाक में फंस गई थी छगनी
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ये कहना है शादी के दो साल बाद पाकिस्तान से लौटी छगनी का। छगनी जैसे ही बॉर्डर पर अपने पति राजस्थान के जैसलमेर के रहने वाले महेंद्र सिंह से मिली तो दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया। छगनी को क्या पता था कि शादी के दो दिन बाद मायके जाने के बाद वापस आने के लिए दो साल तक इंतजार करना पड़ेगा।
अटारी सीमा पर पहुंची छगनी ने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी शादी जैसलमेर के महेंद्र से हुई थी। महेंद्र बारात लेकर जैसलमेर से थार एक्सप्रेस के माध्यम से पाकिस्तान गया था। शादी के बाद वह अपने पति के साथ मायके गई थी। पति तो घर लौट आया लेकिन रिवाज के अनुसार उसे कुछ दिन मायके में ही रुकना था। ये कुछ दिन इतने लंबे होंगे इसका उसे अंदेशा नहीं था।
दोनों देशों के बीच संबंध खराब होने के कारण जहां समझौता एक्सप्रेस बंद हो गई, वहीं थार एक्सप्रेस के पहिये भी रोक थम गए। हाथ में लाल चूड़ा पहने छगनी ने बताया कि इसे उतारने की रस्म ससुराल में होती है इसलिए उसने इसे नहीं उतारा। वहीं पत्नी को लेने अटारी सीमा पर पहुंचे महेंद्र सिंह ने बताया उसने दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास से कई बार वीजा मांगा लेकिन उसे नहीं दिया गया। महेंद्र ने बताया कि जैसलमेर-बाड़मेर इलाके के लोगों के पाकिस्तान में रहने वाले राजस्थान मूल के लोगों के साथ पारिवारिक संबंध हैं। अटारी सीमा पर छगनी का कोरोना टेस्ट भी हुआ। वह पाकिस्तान से भी टेस्ट की रिपोर्ट अपने साथ लेकर आई थी। बाद में दोनों पति-पत्नी बस से रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हो गए। वहां से वो राजस्थान जाएंगे।
दो साल बाद पति से मिलकर सफर की थकान मिटी
वहीं एक अन्य नवविवाहिता कैलाश भी दो साल के बाद पाकिस्तान से लौटी। अटारी सीमा पर उसे लेने पति नेपाल सिंह और परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे थे। बेटी को ससुराल छोड़ने के लिए मां मोर कंवर भी भारत पहुंचीं। मां ने बताया कि बेटी को ससुराल भेजने के लिए पूरा परिवार प्रयास कर रहा था लेकिन वीजा नहीं मिल रहा था। कोरोना के कारण फंसे कई भारतीयों को इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास ने वीजा जारी किया लेकिन उनकी बारी बहुत देर से आई। पति का दीदार कर सारी थकान मिट गई है।