{"_id":"5936f2104f1c1b69259c7d89","slug":"upsc-topper-navya-singla-special-interview","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"UPSC की ये टॉपर नहीं इस्तेमाल करती कोई भी सोशल मीडिया, कमाल के 5 टिप्स","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UPSC की ये टॉपर नहीं इस्तेमाल करती कोई भी सोशल मीडिया, कमाल के 5 टिप्स
आशीष वर्मा, सुशील गंभीर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 07 Jun 2017 11:42 PM IST
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Tricity UPSC Topper Navya Singla
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ईमानदारी के प्रति सकारात्मक सोच, देश सेवा की ललक और चुनौतियों से जूझने का जज्बा, नव्या सिंगला के व्यक्तित्व में ये सब बिलकुल साफ नजर आते हैं। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 102वां रैंक पाया। ट्राइसिटी की वह टॉपर हैं। पहले ही प्रयास में उन्होंने सफलता प्राप्त की। 23 साल की नव्या में आत्मविश्वास गजब का है।
यूपीएससी टॉपर पंचकूला की नव्या सिंगला
मंगलवार को वह अपनी मां के साथ अमर उजाला के दफ्तर पहुंचीं। इस दौरान उनसे लंबी बातचीत हुई। उनकी सफलता की राह जानने के साथ यह भी समझने की कोशिश की गई कि एक आईएएस के तौर पर उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
सवाल- आईएस बनना कितना मुश्किल है?
जवाब- यह सबसे बड़ी परीक्षा है। किसी बड़े मुकाम पर पहुंचना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन अगर आप शिद्दत से मेहनत करें, आपकेपास सुविधाएं और परिवार का सहयोग मिले तो नामुमकिन कुछ भी नहीं है। मेहनत का नतीजा आने में देर हो सकती है, लेकिन मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।
सवाल- आईएस बनना कितना मुश्किल है?
जवाब- यह सबसे बड़ी परीक्षा है। किसी बड़े मुकाम पर पहुंचना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन अगर आप शिद्दत से मेहनत करें, आपकेपास सुविधाएं और परिवार का सहयोग मिले तो नामुमकिन कुछ भी नहीं है। मेहनत का नतीजा आने में देर हो सकती है, लेकिन मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।
यूपीएससी टॉपर पंचकूला की नव्या सिंगला
सवाल- आईएएस ही क्यों बनना चाहती थीं?
जवाब- मेरे एक पारिवारिक रिश्तेदार हैं, जो आईएएस हैं। उनका मुझ पर काफी प्रभाव रहा है। मैं एक बार उनके साथ असम गई। तब उनकी पोस्टिंग वहीं पर थी। मैंने देखा कि उनकी मेहनत और आइडिया से हर तरफ गेहूं के खेत लहलहा रहे हैं। आइडिया और सोच से बेकार जमीन को उपजाऊ बना दिया। तभी लगा कि कोई ऐसा ओहदा होना चाहिए, जिस पर रहते हुए समाज केलिए काम किया जा सके।
जवाब- मेरे एक पारिवारिक रिश्तेदार हैं, जो आईएएस हैं। उनका मुझ पर काफी प्रभाव रहा है। मैं एक बार उनके साथ असम गई। तब उनकी पोस्टिंग वहीं पर थी। मैंने देखा कि उनकी मेहनत और आइडिया से हर तरफ गेहूं के खेत लहलहा रहे हैं। आइडिया और सोच से बेकार जमीन को उपजाऊ बना दिया। तभी लगा कि कोई ऐसा ओहदा होना चाहिए, जिस पर रहते हुए समाज केलिए काम किया जा सके।
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यूपीएससी टॉपर पंचकूला की नव्या सिंगला
सवाल- यदि आप आईएएस न होतीं तो किस क्षेत्र में कैरियर बनातीं
जवाब- मकसद पहले से ही तय था कि सोसायटी के लिए काम करना है। अगर सिविल सर्विस में न जाती तो इकोनॉमिक्स की पढ़ाई को आगे बढ़ातीं। जेएनयू से मास्टर की पढ़ाई करने के बाद विदेश में पढ़ाई करने का लक्ष्य था, ताकि वापस आकर समाज के लिए कुछ बेहतर काम कर सकूं।
जवाब- मकसद पहले से ही तय था कि सोसायटी के लिए काम करना है। अगर सिविल सर्विस में न जाती तो इकोनॉमिक्स की पढ़ाई को आगे बढ़ातीं। जेएनयू से मास्टर की पढ़ाई करने के बाद विदेश में पढ़ाई करने का लक्ष्य था, ताकि वापस आकर समाज के लिए कुछ बेहतर काम कर सकूं।
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यूपीएससी टॉपर पंचकूला की नव्या सिंगला
सवाल- आईएएस की तैयारी कब से शुरू की?
जवाब- जब नौवीं क्लास में थीं, तभी सोच लिया था कि आईएएस बनना है, लेकिन इसकी तैयारी ग्रेजुएशन के बाद शुरू की। परिवार की ओर से कहा गया था कि जो पढ़ाई कर रही हो, पहले उसे अच्छे से करो। बाद में अगली मंजिल के लिए जी-जान से जुटो।
जवाब- जब नौवीं क्लास में थीं, तभी सोच लिया था कि आईएएस बनना है, लेकिन इसकी तैयारी ग्रेजुएशन के बाद शुरू की। परिवार की ओर से कहा गया था कि जो पढ़ाई कर रही हो, पहले उसे अच्छे से करो। बाद में अगली मंजिल के लिए जी-जान से जुटो।