कहानी सुषमा स्वराज की। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री से लेकर देश की विदेश मंत्री तक तमाम उपलब्धियां सुषमा स्वराज के हिस्से हैं। जब बात सुषमा स्वराज की हो रही है उनसे जुड़े राजनीति के कुछ रोचक तथ्य भी जान लीजिए।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सुषमा स्वराज कभी अपने 'घर' में लोकसभा चुनाव नहीं जीतीं। वो अपने 'घर' में तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ी और तीनों बार ही शिकस्त मिली। वो भी एक ही नेता से। सुषमा स्वराज मूलरूप से हरियाणा की रहने वालीं थीं। हरियाणा का अंबाला शहर उनकी जन्मस्थली है। देश की राजनीति में नाम कमा चुकी अंबाला की बेटी सुषमा स्वराज के लिए हरियाणा की राजनीति का अनुभव अच्छा नहीं रहा।
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सुषमा स्वराज(फाइल फोटो)
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सुषमा ने हरियाणा में तीन लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन तीनों में ही जीत का स्वाद नहीं चख पाईं। दो बार उनका मुकाबला बेहद करीबी रहा। एक बार वह बड़े अंतर से पराजित हुईं थीं। पहला चुनाव सुषमा ने करनाल से 1980 में लड़ा। मुकाबला कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा से था। सुषमा मात्र 1,29, 458 वोट ही ले पाईं। उन्होंने जनता पार्टी के चुनाव चिह्न पर ताल ठोकी थी।
चिरंजी लाल को 1,51, 786 वोट मिले थे। 1984 में दूसरा चुनाव भाजपा से करनाल सीट पर ही लड़ा, चिरंजी लाल फिर उनके सामने थे। इस चुनाव में सुषमा तीसरे नंबर पर पिछड़ गईं। उन्हें मात्र 77,870 वोट मिले। दूसरे स्थान पर आईसीजे के देवी सिंह रहे, जिन्होंने 148,111 वोट हासिल किए थे। चिरंजी लाल को जीत मिली, उन्होंने 2,47,063 वोट हासिल किए थे।
1989 में सुषमा ने एक बार फिर करनाल से ही किस्मत आजमाई, मगर इस बार भी भाग्य में जीत नहीं थी। उन्हें करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। चिरंजी लाल लगातार तीसरी बार जीते और सुषमा निरंतर तीसरी बार हारीं। सुषमा को 2,65,792 वोट हासिल हुए थे, जबकि चिरंजी लाल शर्मा को 2,74,465 वोट मिले थे। इसके बाद सुषमा ने कभी हरियाणा से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा।