पेशे से वकील लड़की की शादी बनी बेमिसाल। अपने जीवनसंगी के साथ फेरे लेने के लिए वह सड़क पर ऐसे निकली, जिसने भी देखा वाहवाही कर उठा।
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Fatehabad Marriage
- फोटो : अमर उजाला
यह अनोखी शादी हुई हरियाणा के फतेहाबाद में। एडवोकेट कीर्ति गिल्होत्रा रथ में सवार होकर बारात लेकर पहुंची। बारात का स्वागत होटल के गेट पर खड़े ससुराल पक्ष के लोगों ने किया। शादी भी बिना दहेज के हुई। शहर में शादी को लेकर दिनभर चर्चा रही। कीर्ति गिल्होत्रा और उनके पिता सुभाषचंद्र इस शादी के जरिये समाज को एक संदेश देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने बेटी को बेटे की तरह रथ में सवार करके बारात निकालने की इच्छा जताई।
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दुल्हन लेकर आई बारात, बिना दहेज की शादी
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इसके लिए कीर्ति के ससुरालजनों ने भी हामी भर दी। शुक्रवार को सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ। हिसार रोड पर सोमा सिटी के अंदर स्थित एक होटल में कीर्ति और अमन वधवा की शादी का कार्यक्रम था। एडवोकेट कीर्ति दोपहर को सब्जी मंडी के सामने एक सजे-धजे रथ पर सवार हुई। रथ के आगे उनके परिजन नाचते-गाते आ रहे थे। कीर्ति भी बैंड बाजे की धुन पर पहले परिवार के साथ नाची और फिर बिग्गी में बैठी।
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Fatehabad Marriage
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रास्ते भर नाच गाना और सेल्फियों का दौर चलता रहा। रास्ते में दुल्हा अमन वधवा निवासी रतिया भी बग्गी में सवार हो गया। लघुसचिवालय के गेट से शुरू हुई बारात सोमा टाऊन के क्लेरियन होटल तक पहुंची। बता दें कि कीर्ति गिल्होत्रा के पिता सुभाष गिल्होत्रा रोडवेज से सेवानिवृत कर्मचारी हैं। उनकी तीन बेटियां हैं, जिन्हें उन्होंने बेटों के समान पढ़ाया है। बेटों की तरह पाला और इस मुकाम तक पहुंचाया।
बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं और मेरी बेटियों ने हमेशा मेरा सिर ऊंचा किया है। ऐसे में समाज को यह संदेश देना चाहता था कि बेटियां किसी मायने में बेटों से पीछे नहीं हैं। इसलिए बेटी को बेटे की तरह रथ में बिठाकर उसकी बारात लेकर शादी करने गए।
- सुभाष चंद्र गिल्होत्रा, कीर्ति गिल्होत्रा के पिता