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भारतीय सेना के जांबाजों को अमेरिकियों ने समझ लिया था जासूस और फिर...33 साल पुरानी घटना पढ़ें
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Dec 2018 01:23 PM IST
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पाक नौका तृष्णा
भारतीय सेना के जांबाजों को अमेरिकी जवानों ने जासूस समझ लिया था और इसके पीछे की वजह शायद ही कोई जानता होगा। घटना 33 साल पुरानी है, उस समय भारतीय जवानों ने एक ऐसा इतिहास रचा था, जिसे पूरी दुनिया ने सराहा।
पाक नौका तृष्णा
यह उस वक्त की घटना है, जब दुनिया को समुद्र के रास्ते नापने का भारतीय सेना का सबसे पहला पाल नौका अभियान शुरू हुआ था। यह अभियान न केवल बेहद रोचक और खतरनाक था, बल्कि इस अभियान को तत्कालीन सरकार की ओर से पर्याप्त फंड तक नहीं मिला। बावजूद उसके इस अभियान को पूरा करने वाले सैन्य अफसरों ने अपनी जान पर खेलकर भारी जोखिम के साथ कुछ ऐसा कर दिखाया, जिस पर आज भी सेना नाज करती है।
पाक नौका तृष्णा
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इस अभियान के बाद जांबाज सेना अफसरों को सम्मान से नवाजा था और 26 जनवरी 1987 की परेड में इस अभियान में इस्तेमाल की गई पाल नौका ‘तृष्णा’ को भाग लेने के आदेश दिए। उस वक्त 10 दिन की मशक्कत के बाद इस पाल नौका को मुंबई से दिल्ली लाया गया और उसे परेड का हिस्सा बनाया गया। इस अभियान के लीडर ब्रिगेडियर टीपीएस चौधरी ने चंडीगढ़ में चल रहे मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में इस अभियान की चुनौतियों से युवाओं को अवगत करवाया।
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पाक नौका तृष्णा
‘अमर उजाला’ से बातचीत में ब्रिगेडियर चौधरी ने बताया कि इस अभियान के लिए जब 1984 में पाल नौका खरीदनी थी, तो फंड की थोड़ी कमी थी। पाल नौका को इंग्लैंड के एक मैन्युफेक्चरर से से 55000 पाउंड से खरीदना था, लेकिन फंड केवल 30000 पाउंड मिले थे। लेकिन वे लोग इस मौके को गंवाना नहीं चाहते थे, इसलिए बाकी राशि, इस अभियान का हिस्सा रहे अफसरों ने अपनी तरफ ये लगाई। लेकिन फिर भी खर्चा बहुत ज्यादा था।
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पाक नौका तृष्णा
इसलिए इंग्लैंड के मैन्युफेक्चरर से 15 साल पुरानी एक पाल नौका खरीदी गई और फिर उसकी मरम्मत करवाई गई। उसके बाद इस पाल नौका से पहले इंग्लैंड से भारत 9000 किलोमीटर का पाल नौका अभियान पूरा किया और फिर 28 सितंबर 1985 में सैन्य अफसर दुनिया का समुद्र के रास्ते नापने चल दिए। कई देशों का सफर तय करने के बाद वे 10 जनवरी 1987 को वापस देश में लौटे। इस अभियान में सैन्य अफसरों ने 54000 किलोमीटर का सफर समुद्र रास्ते तय किया था।