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भारतीय सेना के जांबाजों को अमेरिकियों ने समझ लिया था जासूस और फिर...33 साल पुरानी घटना पढ़ें

Sat, 08 Dec 2018 01:23 PM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 08 Dec 2018 01:23 PM IST
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Trishna - First Indian Sailing Expedition Around the World 1985-1987, Military Literature Festival
पाक नौका तृष्णा
भारतीय सेना के जांबाजों को अमेरिकी जवानों ने जासूस समझ लिया था और इसके पीछे की वजह शायद ही कोई जानता होगा। घटना 33 साल पुरानी है, उस समय भारतीय जवानों ने एक ऐसा इतिहास रचा था, जिसे पूरी दुनिया ने सराहा।
Trishna - First Indian Sailing Expedition Around the World 1985-1987, Military Literature Festival
पाक नौका तृष्णा
यह उस वक्त की घटना है, जब दुनिया को समुद्र के रास्ते नापने का भारतीय सेना का सबसे पहला पाल नौका अभियान शुरू हुआ था। यह अभियान न केवल बेहद रोचक और खतरनाक था, बल्कि इस अभियान को तत्कालीन सरकार की ओर से पर्याप्त फंड तक नहीं मिला। बावजूद उसके इस अभियान को पूरा करने वाले सैन्य अफसरों ने अपनी जान पर खेलकर भारी जोखिम के साथ कुछ ऐसा कर दिखाया, जिस पर आज भी सेना नाज करती है।

 
Trishna - First Indian Sailing Expedition Around the World 1985-1987, Military Literature Festival
पाक नौका तृष्णा
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इस अभियान के बाद जांबाज सेना अफसरों को सम्मान से नवाजा था और 26 जनवरी 1987 की परेड में इस अभियान में इस्तेमाल की गई पाल नौका ‘तृष्णा’ को भाग लेने के आदेश दिए। उस वक्त 10 दिन की मशक्कत के बाद इस पाल नौका को मुंबई से दिल्ली लाया गया और उसे परेड का हिस्सा बनाया गया। इस अभियान के लीडर ब्रिगेडियर टीपीएस चौधरी ने चंडीगढ़ में चल रहे मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में इस अभियान की चुनौतियों से युवाओं को अवगत करवाया।
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Trishna - First Indian Sailing Expedition Around the World 1985-1987, Military Literature Festival
पाक नौका तृष्णा
‘अमर उजाला’ से बातचीत में ब्रिगेडियर चौधरी ने बताया कि इस अभियान के लिए जब 1984 में पाल नौका खरीदनी थी, तो फंड की थोड़ी कमी थी। पाल नौका को इंग्लैंड के एक मैन्युफेक्चरर से से 55000 पाउंड से खरीदना था, लेकिन फंड केवल 30000 पाउंड मिले थे। लेकिन वे लोग इस मौके को गंवाना नहीं चाहते थे, इसलिए बाकी राशि, इस अभियान का हिस्सा रहे अफसरों ने अपनी तरफ ये लगाई। लेकिन फिर भी खर्चा बहुत ज्यादा था।
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Trishna - First Indian Sailing Expedition Around the World 1985-1987, Military Literature Festival
पाक नौका तृष्णा
इसलिए इंग्लैंड के मैन्युफेक्चरर से 15 साल पुरानी एक पाल नौका खरीदी गई और फिर उसकी मरम्मत करवाई गई। उसके बाद इस पाल नौका से पहले इंग्लैंड से भारत 9000 किलोमीटर का पाल नौका अभियान पूरा किया और फिर 28 सितंबर 1985 में सैन्य अफसर दुनिया का समुद्र के रास्ते नापने चल दिए। कई देशों का सफर तय करने के बाद वे 10 जनवरी 1987 को वापस देश में लौटे। इस अभियान में सैन्य अफसरों ने 54000 किलोमीटर का सफर समुद्र रास्ते तय किया था।
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