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शहीद ऊधम सिंह: 41 साल बाद भी यादगारों को मुकाम की तलाश

Sat, 26 Dec 2015 09:11 AM IST
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब) Updated Sat, 26 Dec 2015 09:11 AM IST
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शहीद ऊधम सिंह: 41 साल बाद भी यादगारों को मुकाम की तलाश

tribute to Shaheed Udham Singh: ashes of shaheed in College

ऊधम सिंह की शहादत के 34 साल बाद उनके अवशेष को विदेश से देश की धरती पर लाया गया। 41 साल गुजरने के बावजूद उनको अभी तक मुकाम नहीं मिला है। देखिए एक रिपोर्ट। रिपोर्ट: अनिल कुमार, फिरोजपुर।

शहीद ऊधम सिंह: 41 साल बाद भी यादगारों को मुकाम की तलाश

tribute to Shaheed Udham Singh: ashes of shaheed in College

शहीद ऊधम सिंह की जन्मभूमि पर हर साल सरकार की तरफ से 31 जुलाई को राज्यस्तरीय शहीदी दिवस मनाते समय सुनाम में म्यूजियम बनाने की बात की जाती है, लेकिन अब तक म्यूजियम नहीं बनने के कारण शहीद की यादगार से जुड़ी वस्तुएं व अहम दस्तावेज विभिन्न जगहों पर धूल चाट रहे हैं। ऊधम सिंह की शहादत के 34 साल बाद 19 जुलाई 1974 को सरकार द्वारा उसके शरीर के अवशेष पेंटनविल जेल लंदन से दिल्ली लाया गया था।

शहीद ऊधम सिंह: 41 साल बाद भी यादगारों को मुकाम की तलाश

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31 जुलाई 1974 को ऊधम सिंह की जन्मभूमि सुनाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। शहीद की अस्थियों के कलश बनाए गए थे और उनमें से दो कलश आज भी (41 साल बाद) सुनाम के शहीद ऊधम सिंह कालेज में पड़े हैं। शहीद ऊधम सिंह के असली पत्र गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में पड़े हैं। इसके अलावा उनके हीर (कविता) पर हस्ताक्षर की कापी देश भगत यादगार हाल जालंधर में पड़ी है।

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शहीद ऊधम सिंह: 41 साल बाद भी यादगारों को मुकाम की तलाश

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उससे संबंधित कुछ वस्तुएं सेंट्रल खालसा यतीम खाना पुतली घर अमृतसर पड़ी हैं। ऊधम सिंह के हस्ताक्षर की हुई एक फोटो आज भी उनके दोस्त के पुत्र अवतार सिंह के पास मंडी गोबिंदगढ़ में पड़ी है। इसी तरह उसकी इस्तेमाल की गई पिस्तौल तथा 1939-1940 की डायरी आदि सामान इंग्लैंड के न्यूसकाट लैंड यार्ड के ब्लैक म्यूजियम में पड़े हैं।

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ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन के कैकस्टन हाल में अकेले माइकल उडवायर पर नहीं बल्कि चार अंग्रेज अधिकारियों पर छह गोलियां चलाईं थीं। उडवायर मौके पर मर गया था जबकि बाकी जख्मी हो गए थे। ये सभी भारत के गवर्नर रह चुके थे और भारत की आजादी के खिलाफ थे। 14 मार्च, 1940 को डेली मिरर की खबर के अनुसार ऊधम सिंह ने पहली दो गोलियां जैटलैंड के मारी थीं। ऊधम सिंह जब मौके पर पकड़ा गया तो उसने पूछा कि जैटलैंड मर गया।

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