जेईई एडवांस्ड के ट्राइसिटी टॉपर्स ने एक बात उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताई है, जो इंजीनियरिंग का सपना देखते हैं, लेकिन जेईई मेन्स तक पहुंचते ही वे रैंक को देखकर निराश होने लगते हैं।
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तमाम विद्यार्थी जेईई मेन्स की परीक्षा में कम अंक आने के कारण आगे जेईई एडवांस्ड की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। टॉपर्स की राय है कि यदि आईआईटी से इंजीनियरिंग का सपना है तो केवल फोकस जेईई एडवांस्ड की परीक्षा पर करें। ऐसा किया तो निश्चित रूप से रैंक बेहतर आएगी।
ट्राइसिटी टॉपर रहे ध्वनित बेनीवाल को जेईई मेन्स में 175 रैंक मिली थी लेकिन जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 10वीं रैंक पाई। इसी तरह द्वितीय टॉपर गुरप्रीत सिंह को जेईई मेन्स में 126 रैंक हासिल हुई थी लेकिन एडवांस्ड में पूरे देश में 23वां स्थान लेकर आए।
तीसरे स्थान पर रहे हेमांक बजाज को 338 रैंक जेईई मेन्स में मिली थी लेकिन जेईई एडवांस्ड में 71 रैंक आई। यह ऐसे विद्यार्थियों के उदाहरण हैं, जो जेईई मेन्स की रैंक कम आने से प्रभावित होते हैं और जेईई एडवांस्ड में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते।
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तीनों टॉपर्स का कहना है कि उनका ध्यान केवल और केवल जेईई एडवांस्ड की परीक्षा पर था। सबसे कठिन इसी की परीक्षा होती है। जब इसकी तैयारी ठीक होगी तो जेईई मेन्स में कम रैंक भी हौसला नहीं गिरने देगी। वे जेईई मेन्स की कम रैंक से प्रभावित न होकर अगली परीक्षा की तैयारी में जुटे थे क्योंकि उनको पता था कि वह छलांग लंबी लगाएंगे और वैसा ही हुआ।