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खाने का तेल इस्तेमाल करें संभलकर, कौन-सा फायदेमंद और किससे होगा नुकसान, यहां जानिए
Tue, 03 Dec 2019 09:18 AM IST
खुशबू गोयल
अरविंद बाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अरविंद बाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 03 Dec 2019 09:18 AM IST
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cooking oil
अगर आप भी खाने के तेल का इस्तेमाल करते हैं तो जरा संभल जाएं। हम आपको बता रहे हैं कि कौन-सा तेल खाने से फायदा होगा और कौन-सा तेल नुकसानदायक है।
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cooking oil
एक ओर फिट होने का जुनून और दूसरी ओर शरीर के लिए आवश्यक आहार लेने की अनिवार्यता। आहार है तो तेल तो होगा ही। ध्यान रखने वाली बात यह है कि खाने में तेल कितना होना चाहिए, ताकि शरीर चुस्त रहे और दिल मजबूत। चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तेल शरीर के लिए आवश्यक है लेकिन उसकी मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि रूटीन में तेल की पर्याप्त मात्रा लें और ऊपर से समोसे, पराठे, पूड़ी, आचार और फ्राइड स्नैक्स भी खाएं। ऐसा करेंगे तो तेल शरीर को नुकसान पहुंचाएगा। सवाल यह भी है कि कौन सा तेल इस्तेमाल करें। विशेषज्ञ कहते हैं कि जिस तेल में ओमेगा-3 की मात्रा ज्यादा होती है, वह दिल के लिए फायदेमंद होता है। इसमें मूंगफली, सरसों, ऑलिव ऑयल प्रमुख हैं।
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सैचुरेटेड और अन सैचुरेटेड फैट को समझें
खाने के तेल दो तरह के होते हैं। सैचुरेटेड और अन सैचुरेटेड। सैचुरेटेड फैट्स में घी, मक्खन, क्रीम, ऑलिव आयल और नारियल का तेल शामिल है। सैचुरेटेड फैट्स को शरीर आसानी से पचा नहीं पाता। डायटीशियन के अनुसार, शारीरिक श्रम करने वाले लोग तो इसे आसानी से पचा लेते हैं। शारीरिक रूप से कम सक्रिय लोगों के लिए यह समस्या खड़ी कर सकता है। सैचुरेटेड फैट्स बैड कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ाते हैं। डायटीशियन का कहना है कि अपवाद के तौर पर नारियल तेल कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता। सैचुरेटेड तेल का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। वहीं, अनसैचुरेटेड फैट्स में रिफाइंड और वनस्पति घी मुख्य रूप से शामिल हैं। इसमें रिफाइंड तेल को अच्छी तरह से प्रोसेस किया जाता है। इससे तेल की लाइफ और टेस्ट तो बढ़ता है पर तेल में ट्रांस फैट आ जाते हैं। ये ट्रांस फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं।
खाने के तेल दो तरह के होते हैं। सैचुरेटेड और अन सैचुरेटेड। सैचुरेटेड फैट्स में घी, मक्खन, क्रीम, ऑलिव आयल और नारियल का तेल शामिल है। सैचुरेटेड फैट्स को शरीर आसानी से पचा नहीं पाता। डायटीशियन के अनुसार, शारीरिक श्रम करने वाले लोग तो इसे आसानी से पचा लेते हैं। शारीरिक रूप से कम सक्रिय लोगों के लिए यह समस्या खड़ी कर सकता है। सैचुरेटेड फैट्स बैड कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ाते हैं। डायटीशियन का कहना है कि अपवाद के तौर पर नारियल तेल कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता। सैचुरेटेड तेल का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। वहीं, अनसैचुरेटेड फैट्स में रिफाइंड और वनस्पति घी मुख्य रूप से शामिल हैं। इसमें रिफाइंड तेल को अच्छी तरह से प्रोसेस किया जाता है। इससे तेल की लाइफ और टेस्ट तो बढ़ता है पर तेल में ट्रांस फैट आ जाते हैं। ये ट्रांस फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं।
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स्मोकिंग प्वाइंट का रखें ख्याल
शेफ विश्वदीप बाली का कहना है कि हर तेल का एक स्मोक प्वाइंट होता है। यह वह तापमान होता है जो तेल को गर्म करने पर नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को निकाल देता है। जिस तेल में स्मोकिंग प्वाइंट ज्यादा होते हैं, वह फायदेमंद होते हैं। देसी घी और सरसों के तेल में स्मोकिंग प्वाइंट ज्यादा होता है। सबसे ज्यादा स्मोकिंग प्वाइंट देसी घी का होता है। यही कारण है कि देसी घी में पका खाना खाने से भूख कम लगती है। विश्वदीप बाली ने कहा कि ऑलिव आयल कोल्ड होता है और उसको कच्चा या हल्का गरम ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑलिव आयल का स्मोकिंग प्वाइंट लो होता है।
शेफ विश्वदीप बाली का कहना है कि हर तेल का एक स्मोक प्वाइंट होता है। यह वह तापमान होता है जो तेल को गर्म करने पर नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को निकाल देता है। जिस तेल में स्मोकिंग प्वाइंट ज्यादा होते हैं, वह फायदेमंद होते हैं। देसी घी और सरसों के तेल में स्मोकिंग प्वाइंट ज्यादा होता है। सबसे ज्यादा स्मोकिंग प्वाइंट देसी घी का होता है। यही कारण है कि देसी घी में पका खाना खाने से भूख कम लगती है। विश्वदीप बाली ने कहा कि ऑलिव आयल कोल्ड होता है और उसको कच्चा या हल्का गरम ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑलिव आयल का स्मोकिंग प्वाइंट लो होता है।
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Cooking
- फोटो : सोशल मीडिया
सरसों का तेल और देसी घी हैं सबसे बेहतर
डायटीशियन मालिनी दहिया कहती हैं कि सरसों का तेल और देसी घी सबसे बेहतर हैं। इनके इस्तेमाल से शरीर में वसा की कमी पूरी होती है और सही मात्रा में लेने पर यह नुकसान भी नहीं करते। देसी घी तो ज्यादा देर तक गरम करने पर भी नुकसान नहीं करता है। ऑलिव आइल में मूफा (मोनो अन सैचुरेटेड) और पूफा (पॉली अन सेचुरेटेड) कम होते हैं। इसमें ओमेगा-3 अच्छी मात्रा में पाई जाती है। इसी तरह, सैचुरेटेड फैट ज्यादा होने की वजह से नारियल तेल को अच्छा नहीं माना जाता। हालांकि यह कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता।
डायटीशियन मालिनी दहिया कहती हैं कि सरसों का तेल और देसी घी सबसे बेहतर हैं। इनके इस्तेमाल से शरीर में वसा की कमी पूरी होती है और सही मात्रा में लेने पर यह नुकसान भी नहीं करते। देसी घी तो ज्यादा देर तक गरम करने पर भी नुकसान नहीं करता है। ऑलिव आइल में मूफा (मोनो अन सैचुरेटेड) और पूफा (पॉली अन सेचुरेटेड) कम होते हैं। इसमें ओमेगा-3 अच्छी मात्रा में पाई जाती है। इसी तरह, सैचुरेटेड फैट ज्यादा होने की वजह से नारियल तेल को अच्छा नहीं माना जाता। हालांकि यह कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता।