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कभी नाम ही काफी था लेकिन अब सिर्फ कहानी बनकर रह जाएगी ‘एचएमटी’

Fri, 28 Oct 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Fri, 28 Oct 2016 12:34 AM IST
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The name was enough of HMT, now will reamin as story only
एचएमटी

नार्दर्न रीजन में हजारों घरों का चिराग जलाने वाली एचएमटी अब एक कहानी बन जाएगी। यह एक और सरकारी उपक्रम का कड़वा सच है। जिसने देश के ट्रैक्टर मैन्युफैक्चर्स को प्रेरणा दी। जब एचएमटी इस रीजन में आई तो उस समय सिर्फ उसका ही राज था। 

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hmt

एचएमटी से जुड़े लोग बताते हैं कि पिंजौर की एचएमटी में बना जेटर हासिल करने के लिए कभी छह माह का इंतजार करना पड़ता था। इस कंपनी ने पंचकूला के साथ परवाणू और सोलन तक के इंडस्ट्रियल एरिया की तस्वीर बदल दी। इस कंपनी ने पंचकूला का नाम दुनिया में चमकाया। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू ने एचएमटी का उद्घाटन 23 अक्तूबर 1963 को किया था। 

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एचएमटी

मशीन टूल्स फैक्टरी के बाद 1975 में ट्रैक्टर यूनिट शुरू हुई तो रोजगार के अपार अवसर मिले। वर्ष 1978 में एचएसआईडीसी के साथ मिलकर पंचकूला और कालका में 40 छोटी यूनिट्स भी स्थापित की गईं। एचएमटी के लिए 842 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई। फैक्टरी की दोनों यूनिट और कॉलोनी के साथ इमारतों का 396 एकड़ में निर्माण हुआ।

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एचएमटी

छह माह तक होता था ट्रैक्टर का इंतजार
एचएमटी की छोटी इकाई चलाने वाले उद्यमी सीबी गोयल ने कहा कि पंचकूला की छोटी यूनिट्स एचएमटी के लिए ट्रैक्टर पार्ट्स बनाती थीं। इनके पास इतना काम था कि कोई दूसरा ऑर्डर ले ही नहीं पाते थे।

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एचएमटी

दिन रात काम करके एचएमटी का आर्डर पूरा किया जाता था। सीबी गोयल ने बताया कि एचएमटी में जेटर ट्रैक्टर बनता था। विश्व प्रसिद्ध एचएमटी के कारण इस  ट्रैक्टर के लिए लोग छह माह पहले ट्रैक्टर की बुकिंग कराते थे। एचएमटी में दो हजार ट्रैक्टर प्रतिमाह तैयार होते थे।

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