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'कोई भी महिलाओं के साथ ऐसा नहीं कर सकता, जो कि वायरल वीडियो में दिखा'

Thu, 22 Dec 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Thu, 22 Dec 2016 01:41 AM IST
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Suspended in the mother-daughter after assaulting policemen trapped, due Know
पुलिस की बर्बरता - फोटो : अमर उजाला

घर में आकर मां-बेटी, भाई और पिता से गाली-गलौच, हाथापाई और मारपीट प्रकरण में कड़े तेवर दिखाते हुए महिला आयोग ने चारों आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश दिए हैं। महिला आयोग ने साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि अब तक पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस वालों के खिलाफ मामला क्यों दर्ज नहीं हुआ। 

Suspended in the mother-daughter after assaulting policemen trapped, due Know
पुलिस की बर्बरता

महिला आयोग ने इस घटना को शर्मनाक और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन और आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रदेश के नागरिकों को एक बेहतर माहौल दे और महिलाओं के सम्मान पर चोट करने वालों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेकर उन्हें सजा भी दिलाए। गौरतलब है कि रविवार को चेक बाउंस मामले में वारंट लेकर गए एक पुलिस कर्मी की शिकायत पर थाना शहर थानेसर में पुलिस की वर्दी फाड़ने, हमला जैसे गंभीर आरोपों के चलते दो महिलाओं सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। 

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वहीं सोमवार पुलिस उस समय बैकफुट पर चली गई, जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो रिकार्डिंग ने पुलिस वालों की बर्बरता की पूरी कहानी बयां कर दी। जहां एक दिन पहले एफआईआर दर्ज कराने वाले पुलिस कर्मी ने उक्त आरोप लगाए थे, वहीं वायरल हुई वीडियो ने प्रदेश महिलाओं के सम्मान और पुलिस के कर्तव्य की पोल खोल कर रख दी थी।
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पुलिस की बर्बरता - फोटो : अमर उजाला

सोमवार को जहां वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस के उच्चाधिकारी एक पुलिस कर्मी को सस्पेंड और तीन की विभागीय जांच की बात कर रहे थे, वहीं कुरुक्षेत्र पहुंची महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री के आदेश पर वीडियो फुटेज में दिख रहे चारों पुलिस वालों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने आदेश दिए गए हैं। वायरल हुई वीडियो पर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को महिला आयोग की उपाध्यक्ष कुरुक्षेत्र पुलिस मुख्यालय पहुंची थीं। उन्होंने पीड़ित पक्ष सतीश मित्तल परिवार के सदस्यों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस मौके पर पीड़ित पक्ष के साथ कुछ सामाजिक और राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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पुलिस की बर्बरता - फोटो : अमर उजाला

महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा कि वीडियो में पुलिस की भूमिका साफ दिख रही है। कोई भी पुलिस का अधिकारी या कर्मचारी या कोई भी पुरुष किसी महिलाओं के साथ ऐसी हरकत नहीं कर सकता, जो कि वायरल हुए वीडियो में दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि हद तो यह है कि उक्त घटनाक्रम पुलिस ने घर में घुस कर अंजाम दे दिया और उलटा पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया। यदि उन्होंने कुछ गलत किया था तो कानून संगत कार्रवाई कर सकते थे, मगर हाथापाई, मारपीट और जिन गंदे शब्दों का प्रयोग महिला के साथ किया गया है, उसकी इजाजत भारत की व्यवस्था में गैरकानूनी है।       

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