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तस्वीरें: नहीं थम रहा पराली जलाने का सिलसिला, किसान बोले- प्रदूषण की वजह वाहन और कारखाने

Thu, 22 Oct 2020 02:41 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 22 Oct 2020 02:41 PM IST
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Stubble burning continues in Punjab, visuals from Amritsar
पराली जलाने की तस्वारें। - फोटो : ANI

पंजाब में पराली की वजह से अब वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। प्रदेश के आठ शहरों की हवा खराब हो चुकी है। लुधियाना की हालत सबसे खराब है। दूसरी तरफ प्रदेश के किसान इन लगातार खेतों में पराली जला रहे हैं। पराली जलाने का ये सिलसिला थमने की जगह और बढ़ता जा रहा है। दीपावली से पराली जलाने की ये तस्वीरें लोगों को चिंता में डाल देंगी। क्योंकि दीपावली के बाद प्रदूषण और बढ़ेगा। अमृतसर के जौहल गांव में किसान पराली जला रहे हैं। यहां के किसानों का कहना है कि वे प्रदूषण के बारे में जागरुक हैं। लेकिन हम मजबूर हैं। पराली प्रबंधन महंगा है और सरकार इसमें सहयोग भी नहीं कर रही। प्रदूषण की मूल वजह वाहन और कारखाने हैं। किसानों को सिर्फ निशाना बनाया जा रहा है।


 

Stubble burning continues in Punjab, visuals from Amritsar
लुधियाना में भी जल रही पराली। - फोटो : ANI

बुधवार को लुधियाना के लाडोवाल गांव से पराली जलाने की घटना सामने आई थी। यहां के एक किसान का कहना है कि हम इसके लिए मजबूर हैं। सरकार हमें कुछ भी उपलब्ध नहीं करा रही है। अमृतसर के काथूनंगल गांव में भी पराली जलाने की घटना सामने आई थी। यहां एक किसान का कहना है कि वायु प्रदूषण में पराली का शायद ही योगदान है। वाहन और कारखानों का प्रदूषण में प्रमुख योगदान है। तीन दिन पहले तरनतारन में पराली जलाने की घटना सामने आई थी। इससे पहले अमृतसर के घरी गांव के खेतों में जलती पराली की तस्वीरें सामने आईं थीं। तरनतारन के भुर्ज गांव में पराली जला रहे किसान का कहना है कि पराली जलाने और बढ़ते प्रदूषण के लिए सरकार जिम्मेदार है। सरकार ने हमें कोई विकल्प नहीं दिया है। 



Stubble burning continues in Punjab, visuals from Amritsar
- फोटो : ANI

पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 280 फीसदी की वृद्धि
पंजाब में पराली जलाने के मामलों में इस बार पिछले साल के मुकाबले 280 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल पंजाब में 21 सितंबर से 12 अक्तूबर तक 775 पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं जो इस साल 2,873 तक पहुंच गई हैं। वहीं, हरियाणा में 25 सितंबर से 14 अक्तूबर तक 1386 से अधिक जगहों पर पराली जलाई जा चुकी है।  



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Stubble burning continues in Punjab, visuals from Amritsar
- फोटो : ANI

प्रदेश के आठ जिलों की हवा हुई खराब
पराली जलाने का असर है कि पंजाब के आठ जिलों की हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है। लुधियाना का वायु गुणवत्ता सूचकांक ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। बाकी सात जिले एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के अनुसार येलो जोन में हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में अभी धान की फसल पूरी तरह से नहीं कटी है। आने वाले दिनों में हालात और भी खराब होने की आशंका है। पंजाब के लिए पराली हमेशा ही परेशानी का सबब रही है। इस साल भी सरकार के दावों के विपरीत पराली जलाने से पंजाब की आबोहवा खराब होने लगी है। 

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Stubble burning continues in Punjab, visuals from Amritsar
- फोटो : ANI

पंजाब के आठ जिलों का एक्यूआई स्तर

  •   क्रम          शहर             एक्यूआई
  • 1.            लुधियाना            218
  •  
  • 2.            पटियाला            165
  •  
  • 3.            बठिंडा                  157
  •  
  • 4.            मंडी गोविंदगढ़       153
  •  
  • 5.            जालंधर                152
  •  
  • 6.             खन्ना                  152
  •  
  • 7.             अमृतसर              145
  •  
  • 8.             रोपड़                     82
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