सात माह बाद पंजाब में 9वीं से 12वीं तक के स्कूल खुल गए हैं। सभी स्कूलों में कोरोना के बचाव के लिए जारी सरकारी निर्देशों का पालन किया गया। बच्चे मास्क पहन स्कूल पहुंचे। स्कूलों में सैनिटाइजर और साबुन की व्यवस्था रही। अबोहर में भी मानक संचालन प्रक्रिया के तहत स्कूल खुले गए।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बच्चे अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद स्कूल पहुंचे। पहले दिन बच्चों को कोरोना से बचाव के बारे में बताया गया। कक्षाओं में छात्रों के बीच छह फुट की दूरी रही। छात्र मास्क पहनने के अलावा एक अतिरिक्त मास्क, पानी की बोतल और सैनिटाइजर भी साथ लाए। स्कूल प्रिंसिपल राजेश सचदेवा ने बताया कि मेन गेट पर ही सभी विद्यार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग अनिवार्य किया गया।
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वहीं लुधियाना के स्कूलों में छात्रों की कम संख्या देखने को मिली। इससे कोरोना के खौफ का अंदाजा लगाया जा सकता है। पहले दिन सरकारी व निजी स्कूलों में 20 प्रतिशत छात्र ही पहुंचे। वहीं स्कूलों का जायजा लेने जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) भी सरकारी स्कूल पहुंचे। बच्चों की कम संख्या देख वे इतने हैरान हुए कि अध्यापकों को अभिभावकों को जागरुक करने का फरमान सुना दिया।
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पहले दिन पीएयू स्थित सरकारी स्कूल में महज चालीस छात्र ही पहुंचे। किसी कक्षा में एक तो किसी में 10 छात्र ही पढ़ाई करते दिखे। अन्य स्कूलों का भी यही हाल रहा। वहीं अभिभावकों का मन छात्रों को स्कूल भेजने का नहीं है। अभिभावकों का कहना कि सरकार एक तरफ कह रही है कि कोरोना की दूसरी लहर आ सकती है। वहीं ऐसे समय में स्कूलों को खोला जा रहा है। ऐसे माहौल में वे अपने बच्चों को स्कूल भेजकर खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं।
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अमृतसर के स्कूलों में सोमवार को न तो प्रार्थना सभा हुई और न ही कैंटीन खोली गई। वहीं सीमित संख्या में ही विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। स्कूलों में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया। स्कूलों में पंजाब सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया गया। एसओपी के अनुसार ही स्कूलों को शिफ्टों में लगाया गया। सरकारी सीसे स्कूल सहंसरा के प्रिंसिपल सतीश कुमार ने बताया कि महामारी से बचाव का पूरा प्रबंध किया गया है। बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही प्रवेश दिया गया है।