नोटबंदी ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ कर रख दी है। लोग पैसे निकालने के लिए सुबह हो या शाम बैंक और एटीएम के आगे लाइन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। सोमवार सुबह भी बैंकों के खुलने से पहले ही लाइनें लग गई थीं। सोमवार को हर बैंक में जबरदस्त भीड़ थी। सुबह के समय ज्यादातर एटीएम से पैसे निकले, लेकिन दो घंटों के अंदर कैश खत्म हो गया। इसके बाद उनमें कैश नहीं डाला गया। सिर्फ सेक्टर-17 बैंक स्कावयर स्थित तीन एटीएम ही काम कर रहे थे।
अभी भी नहीं मिल रहे पैसे, बेटे की शादी रद्द कर लाइन में लोग
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नोटबंदी का असर घर खर्च, जेब खर्च पर ही नहीं बल्कि शादी-ब्याह पर भी पड़ा है। सेक्टर-17 में एटीएम के बाहर रुपये निकालने के लिए लाइन में खड़े लुधियाना निवासी अशोक नंदा ने बताया कि रुपये की कमी के कारण बेटे की शादी की तारीख आगे बढ़ा दी है। उनके बेटे की शादी 10 दिसंबर को थी जो कि कैंसिल कर दी गई है। अशोक ने बताया कि लुधियाना में तो पैसे कहीं से भी नहीं मिल रहे थे। वे डेराबस्सी किसी रिश्तेदार के पास आए थे। वे वहां कई एटीएम में गए लेकिन पैसे नहीं निकले। अब वे यहां चंडीगढ़ आ गए हैं, लेकिन यहां भी लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं।
दो बच्चों को लेकर लाइन में लगी-
सेक्टर-42 स्थित एसबीआई के एटीएम के बाहर अपने दो छोटे-छोटे बेटों को लेकर लाइन में लगी रितु ने बताया कि उनकी ननद पीएनबी के एटीएम में लगी हुई हैं। बड़े बेटे को स्कूल भेजने की बजाय लाइन में लेकर खड़ा होना पड़ा है। लेकिन इतनी भीड़ है कि अभी कम से कम दो घंटे बाद नंबरआएगा। तब तक पता नहीं कैश बचेगा भी या नहीं।
एक महीने से मूवी और शॉपिंग बंद-
सेक्टर-23 की रहनेवाली मनु कुमारी ने बताया कि जब से नोटबंदी हुई है, तब से मूवी और शॉपिंग बिल्कुल बंद हो गई है। इस महीने तो अब तक पीजी का किराया भी नहीं दिया है। मकान मालिक आते जाते पूछता है पैसे मिले की नहीं। एक-एक रुपया खर्च करने से पहले 50 बार सोचना पड़ रहा है। मनू ने बताया कि सेक्टर-23 में न तो रविवार को कोई एटीएम चला और न ही सोमवार को। सरकार को इस नीति को लागू करने से पहले पर्याप्त व्यवस्था कर लेनी चाहिए थी। ऐसा लगता है कि बिना किसी तैयारी के नोटबंदी लोगों पर थोप दी गई है।
70 लाख की जगह 3 लाख मिल रहे बैंकों को- बैंकों का कहना है कि उनके पास जरूरत का चौथा हिस्सा भी नहीं मिल रहा है। कम से कम जरूरत का आधा पैसा तो मिले। सेक्टर-32 स्थित बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच मैनेजर कुलदीप सिंह ने बताया कि उनके बैंक में रोजाना करीब 70 से 80 लाख रुपये की जरूरत होती है। लेकिन सोमवार को बैंक के पास सिर्फ 3 लाख रुपये आए हैं। जो कि दो घंटे में खत्म हो जाएंगे। ऐसे में लोग बैंक पर पैसे न देने का आरोप लगता है। लेकिन बैंक में पैसा ही नहीं है तो लोगों को कहां से दें।