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Chandigarh-Haryana News: कांग्रेस में सीएम के चेहरे को लेकर पहले से एलान न करने की पैरवी
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- पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने हाईकमान को पत्र लिखकर 2029 का चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने का मुद्दा उठाया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में 2029 के विधानसभा चुनाव से करीब तीन साल पहले ही मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खींचतान सामने आने लगी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने पार्टी हाईकमान को पत्र लिखकर चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर नेताओं द्वारा किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नाम न लेते हुए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अब उनके बेटे सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के तौर पर आगे किए जाने की चर्चाओं पर निशाना साधा है। हाल ही में बरोदा से कांग्रेस विधायक इंदूराज नरवाल ने भी सार्वजनिक मंच से भूपेंद्र हुड्डा व दीपेंद्र हुड्डा दोनों को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताया था।
शर्मा ने प्रदेश प्रभारी संजय दत्त, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत हाईकमान से 2029 का चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने की पैरवी की है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने के बजाय चुनाव परिणाम आने के बाद इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के पंजाब में सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने संबंधी हालिया बयान का भी हवाला दिया है।
एक चेहरे को आगे करने से नुकसान का तर्क
शर्मा ने कहा है कि पिछले चुनावों में कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके पीछे कई कारण रहे जिनमें चुनाव से पहले किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाना भी शामिल है। उनके अनुसार इससे संगठन और सामूहिक नेतृत्व के बजाय व्यक्ति केंद्र में आ जाता है। कहा- दीपेंद्र हुड्डा को 2029 के लिए संभावित चेहरे के तौर पर आगे किए जाने से पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं व विभिन्न सामाजिक समूहों को साथ लेकर चलने में दिक्कत हो सकती है।
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चुनाव के बाद हाईकमान तय करे सीएम
शर्मा ने नेताओं से व्यक्तिगत खेमेबाजी से बचकर संगठन मजबूत करने की अपील की है। उनका कहना है कि 2029 का चुनाव किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं बल्कि कांग्रेस की विचारधारा, नीतियों और सामूहिक नेतृत्व के आधार पर लड़ा जाना चाहिए। सत्ता मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करे।
इससे पहले भी अगस्त 2026 में शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर सज्जन कुमार को लेकर दीपेंद्र हुड्डा के बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति से हटाने की मांग की थी। हालांकि बाद में चंडीगढ़ में उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को बड़ा नेता बताते हुए दीपेंद्र के माफी मांगने के बाद विवाद खत्म होने की बात कही थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में 2029 के विधानसभा चुनाव से करीब तीन साल पहले ही मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खींचतान सामने आने लगी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने पार्टी हाईकमान को पत्र लिखकर चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर नेताओं द्वारा किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नाम न लेते हुए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अब उनके बेटे सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के तौर पर आगे किए जाने की चर्चाओं पर निशाना साधा है। हाल ही में बरोदा से कांग्रेस विधायक इंदूराज नरवाल ने भी सार्वजनिक मंच से भूपेंद्र हुड्डा व दीपेंद्र हुड्डा दोनों को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताया था।
शर्मा ने प्रदेश प्रभारी संजय दत्त, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत हाईकमान से 2029 का चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने की पैरवी की है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने के बजाय चुनाव परिणाम आने के बाद इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के पंजाब में सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने संबंधी हालिया बयान का भी हवाला दिया है।
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एक चेहरे को आगे करने से नुकसान का तर्क
शर्मा ने कहा है कि पिछले चुनावों में कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके पीछे कई कारण रहे जिनमें चुनाव से पहले किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाना भी शामिल है। उनके अनुसार इससे संगठन और सामूहिक नेतृत्व के बजाय व्यक्ति केंद्र में आ जाता है। कहा- दीपेंद्र हुड्डा को 2029 के लिए संभावित चेहरे के तौर पर आगे किए जाने से पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं व विभिन्न सामाजिक समूहों को साथ लेकर चलने में दिक्कत हो सकती है।
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चुनाव के बाद हाईकमान तय करे सीएम
शर्मा ने नेताओं से व्यक्तिगत खेमेबाजी से बचकर संगठन मजबूत करने की अपील की है। उनका कहना है कि 2029 का चुनाव किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं बल्कि कांग्रेस की विचारधारा, नीतियों और सामूहिक नेतृत्व के आधार पर लड़ा जाना चाहिए। सत्ता मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करे।
इससे पहले भी अगस्त 2026 में शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर सज्जन कुमार को लेकर दीपेंद्र हुड्डा के बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति से हटाने की मांग की थी। हालांकि बाद में चंडीगढ़ में उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा को बड़ा नेता बताते हुए दीपेंद्र के माफी मांगने के बाद विवाद खत्म होने की बात कही थी।