परिवार का पेट पालने के लिए यूपी के शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत जिलों के युवाओं ने अपना घर छोड़कर भिवानी में कपड़े का काम शुरू किया था। सभी एक-दूसरे से रिश्तेदारी या जान-पहचान के कारण जुड़े थे। भिवानी में रहकर सभी कपड़े की फेरी लगाते थे। इनके परिवारों को क्या पता था कि हादसे में 11 युवाओं को जिंदगी सदा के लिए खत्म हो जाएगी। हादसे के बाद सभी के घरों में मातम पसर गया।
{"_id":"5bdf780cbdec2269360cb5c7","slug":"sonipat-road-accident-the-people-who-were-killed-were-left-village-for-their-family","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"सोनीपत हादसाः परिवार पालने के लिए छोड़ा था गांव-घर, एक दिन पहले ही मनाया था मातम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोनीपत हादसाः परिवार पालने के लिए छोड़ा था गांव-घर, एक दिन पहले ही मनाया था मातम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोहाना
Updated Mon, 05 Nov 2018 09:04 AM IST
विज्ञापन
सोनीपत रोड दुर्घटना
- फोटो : अमर उजाला
यूपी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
यूपी के कैराना के मोहल्ला गुली छडियान निवासी फरमान ने मोहल्ले के फारूख, शामली के गांव अकबरपुर सुन्हेटी निवासी सरवेज, कैराना के गांव पंजीट निवासी सबनूर, मुजफ्फरनगर के शाहपुर निवासी तहसीम, सादाब और जैद उर्फ काला, शामली निवासी सुहैल, मुजफ्फरनगर के गांव बुढ़ाना निवासी मुबारक, बागपत के कस्बा छपरौली निवासी दानिश व छपरौली के पट्टी चौधराण निवासी कासिम तथा अन्य साथियों के साथ मिलकर भिवानी में कपड़े की फेरी लगाते थे। इनके साथ कैराना के छडियान का रहने वाला नौसाद भी काम करता था।
मृत शरीर
- फोटो : अमर उजाला
नौसाद को पिछले दिनों बुखार हुआ था। इसके बाद वह भिवानी से लौट घर आ गया था। शनिवार को उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी जब उसके साथ काम करने वाले साथियों को लगी तो वह भिवानी से कैराना आ गए थे। सभी ने नौसाद की मौत पर उसके घर जाकर मातम मनाया था। रविवार को वहीं से भिवानी के लिए निकले थे और रास्ते में हादसे के शिकार हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
मृत शरीर
- फोटो : अमर उजाला
त्योहारी सीजन के कारण एक दिन बाद ही लौटने का लिया फैसला
खानपुर मेडिकल कॉलेज में पहुंचे परिजनों ने बताया कि अक्सर जब सभी भिवानी से घर आते थे तो कुछ दिन रुकते थे। दिवाली का पर्व होने के चलते उनका धंधा चल रहा था। इसके चलते उन्होंने मातम मनाने एक दिन बाद ही लौटने का निर्णय लिया। सभी ने क्रूजर को किराये पर लिया था।
खानपुर मेडिकल कॉलेज में पहुंचे परिजनों ने बताया कि अक्सर जब सभी भिवानी से घर आते थे तो कुछ दिन रुकते थे। दिवाली का पर्व होने के चलते उनका धंधा चल रहा था। इसके चलते उन्होंने मातम मनाने एक दिन बाद ही लौटने का निर्णय लिया। सभी ने क्रूजर को किराये पर लिया था।
विज्ञापन
पीड़ित परिवार वाले
- फोटो : अमर उजाला
अस्पताल पहुंचे परिजनों का रोकर बुरा हाल
हादसे की सूचना के बाद जब परिजन खानपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो उन्हें 11 युवाओं की मौत की खबर मिली। इसके बाद परिजनों का रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बताया कि कुछ घंटे पहले वह उनसे मिलकर आए थे। अब उनके शव आंखों के सामने हैं। कई परिजनों के गले इस कदर रूंधे थे कि आवाज नहीं निकल रही थी।
हादसे की सूचना के बाद जब परिजन खानपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो उन्हें 11 युवाओं की मौत की खबर मिली। इसके बाद परिजनों का रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बताया कि कुछ घंटे पहले वह उनसे मिलकर आए थे। अब उनके शव आंखों के सामने हैं। कई परिजनों के गले इस कदर रूंधे थे कि आवाज नहीं निकल रही थी।