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नेत्रहीनों की जिंदगी में उजाला लाएगी स्मार्ट स्टिक, बताएगी रास्ता...जानिए सात खासियतें

Fri, 07 Sep 2018 06:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला सिटी (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला सिटी (हरियाणा) Updated Fri, 07 Sep 2018 06:02 PM IST
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Smart stick created by students for blind in Ambala
स्मार्ट स्टिक
नेत्रहीनों की जिंदगी में उजाला लाने के लिए एक नायाब अविष्कार हुआ है। अब उन्होंने तमाम मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी।
Smart stick created by students for blind in Ambala
सांकेतिक तस्वीर
अंबाला के बाल वैज्ञानिकों ने ऐसी सेंसर युक्त स्टिक तैयार की है जो नेत्रहीनों को रास्ता बताएगी। स्कूली विद्यार्थियों ने किडो बॉटिक्स संस्था की मदद से इस ‘इलेक्ट्रॉनिक ब्लाइंड स्टिक’ का निर्माण किया है। किडो बॉटिक्स अंबाला के छठी कक्षा के विद्यार्थी दक्ष गोयल, दसवीं कक्षा के विद्यार्थी आर्यन अग्रवाल व आठवीं कक्षा के विद्यार्थी आकाश कुशवाहा अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं जिन्होंने संस्था के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर कामयाबी अर्जित की है।

य हैं खासियतें

Smart stick created by students for blind in Ambala
अंधा
स्टिक में लगा अल्ट्रासोनिक सेंसर व्यक्ति जिस दिशा में बढ़ रहा होगा उसमें मौजूद अवरोध को काफी दूर से ही बिना किसी तार के पहचान लेगा और उसे ऑडियो संकेत में बदल देगा। इसके अलावा स्टिक आग, तापमान, बारिश और अकेले घर में होने पर भी रक्षा करेगी। स्टिक में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम भी है।
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Smart stick created by students for blind in Ambala
eye
अगर इस छड़ी को इस्तेमाल करने वाला इंसान तय दिशा से दूसरी ओर मुड़ता है तो यह स्टिक वाइब्रेट करती है और सही दिशा की ओर संकेत देती है। इस स्टिक का इस्तेमाल करने वाले बुजुर्ग के दिल की धड़कन अगर तेज होती है तो यह अपने आप आपातकालीन सेवाओं को सूचित कर देगी।
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छोटी उम्र से ही विद्यार्थियों की वैज्ञानिक रुचि की पहचान कर रही संस्था

Smart stick created by students for blind in Ambala
eye sight
किडो बॉटिक्स संस्था की डायरेक्टर ज्योति गुप्ता ने बताया कि नई पीढ़ी की यह स्टिक न सिर्फ बुजुर्गों को अपने घर का रास्ता ढूंढने में मदद करेगी बल्कि उनके दिल की धड़कन और शरीर के तापमान पर भी नजर रखेगी। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चे छह माह से संस्था के साथ जुड़े हैं, जिनके साथ मिलकर संस्था इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। संस्था ने विद्यार्थियों को गाइड किया और स्टिक बनाने में 90 प्रतिशत कार्य विद्यार्थियों द्वारा किया गया है। संस्था के साथ अन्य विद्यार्थी भी जुड़े हैं।
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