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किसान पिता का जुनूनी गोल्ड मेडलिस्ट बेटा घर लौटा तो फूट-फूट कर रोया, वजह आपको रुला देगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नरवाना(हरियाणा)
Updated Fri, 07 Sep 2018 05:32 PM IST
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गोल्ड मेडलिस्ट मंजीत सिंह
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पिता किसान और 20 साल का बेटा इतनी जुनूनी कि गोल्ड मेडल जीत लाया, लेकिन जब घर लौटा तो फूट-फूट कर रोया। इसके पीछे की वजह आपको भी रुला देगी...
गोल्ड मेडलिस्ट मंजीत सिंह
एशियन गेम्स की 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाले मनजीत चहल वीरवार दोपहर बाद नरवाना अपने घर पहुंचे। इस दौरान मनजीत ने अपने बेटे प्यार कर सफर की थकान उतारी। घर पहुंचने पर मनजीत की मां ने अपने बेटे की बदौलत मिली प्रसिद्धि पर कहा कि ‘मेरे लाल मन्नै तू नीं, तन्नैं मैं जण दी’। इस पर करीब सात माह बाद घर आए मनजीत चहल अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाए और मां बिमला देवी से लिपटकर खूब रोए। इससे पहले जींद जिला की सीमा में प्रवेश करते ही डीसी अमित खत्री द्वारा उनका स्वागत किया गया।
गोल्ड मेडलिस्ट मंजीत सिंह
मनजीत जहां से निकला हजारों नागरिकों ने उनको पलकों पर बिठाकर स्वागत किया। स्वागत जुलूस हरियल चौक से शुरू होकर कैनाल रोड, रेलवे स्टेशन, अग्रसेन चौक, सुभाष चौक, भगत सिंह चौक होते हुए बाबा गैबी साहिब पहुंचा। बाबा गैबी साहिब में उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह अपने घर पहुंचे और मां से लिपटकर खुशियां बांटी। हर चौक पर शहर की सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संस्थाओं ने उनका नोटों की मालाओं और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया और ओलंपिक गेम्स के लिए शुभकामनाएं दी।
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मनजीत सिंह
मां को समर्पित किया गोल्ड मेडल
चार घंटों की इंतजार के बाद मनजीत अपने घर पहुंचे। इससे पूर्व घर की महिलाओं ने उनकी आरती उतारने की तैयारियां की हुई थीं। मां को देखते ही वह अपने को रोक नहीं सका और मां से लिपटकर खूब खुशी के आंसू बहाए। बाद में उन्होंने अपनी मां को गोल्ड मेडल समर्पित किया। उन्होंने कहा कि वह आज जहां पहुंचा है वहां पहुंचाने में मां और पिता रणधीर सिंह का अहम योगदान रहा है।
चार घंटों की इंतजार के बाद मनजीत अपने घर पहुंचे। इससे पूर्व घर की महिलाओं ने उनकी आरती उतारने की तैयारियां की हुई थीं। मां को देखते ही वह अपने को रोक नहीं सका और मां से लिपटकर खूब खुशी के आंसू बहाए। बाद में उन्होंने अपनी मां को गोल्ड मेडल समर्पित किया। उन्होंने कहा कि वह आज जहां पहुंचा है वहां पहुंचाने में मां और पिता रणधीर सिंह का अहम योगदान रहा है।
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मनजीत सिंह
बेटे को लड़ाए लाड़
मनजीत अपने साढ़े चार माह के बेटे अबीर से पहली बार मिले। मनजीत पिछले सात माह से घर से बाहर था। मनजीत ने अपने बेटे को पहली बार देखा और खूब प्यार किया। मनजीत ने बेटे अबीर के साथ समय बिताकर अपनी थकान मिटाई।
मनजीत अपने साढ़े चार माह के बेटे अबीर से पहली बार मिले। मनजीत पिछले सात माह से घर से बाहर था। मनजीत ने अपने बेटे को पहली बार देखा और खूब प्यार किया। मनजीत ने बेटे अबीर के साथ समय बिताकर अपनी थकान मिटाई।