भूख के मारे बिलख-बिलख कर 6 महीने की बच्ची के आंसू सूख गए और उसने दम तोड़ दिया, लेकिन उसे फेंकने वाले मां-बाप का दिल नहीं पसीजा।
कोई कैसे अपने कलेजे के टुकड़े का झाड़ियों में फेंक कर मरने के लिए छोड़ सकता है? इतना क्रूर काम करने से पहले मां-बाप के हाथ नहीं कांपे। हर किसी की जुबान पर ये सवाल था, लेकिन कोई कुछ नहीं कर पा रहा था, सिवाय दुनिया से रो-रोकर विदा हो चुकी बच्ची के शव को देखकर अफसोस जताने की बजाय।
घटना हरियाणा के भिवानी की है। तोशाम के खानक गांव में सड़क किनारे झाड़ियों में 5-6 महीने की बच्ची का शव मिला। पुलिस को शक है कि माता-पिता बच्ची को लावारिस हालत में छोड़ गए, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार बच्ची के शरीर पर किसी तरह की चोट के निशान नहीं है। मासूम के चेहरे पर आंसू सूखने के निशान यह बताने के लिए काफी हैं कि जो भी बच्ची को लावारिस छोड़कर गया, वह कितना पत्थर दिल इंसान होगा।
फिलहाल पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धारा 317 (परवरिश की बजाय लावारिस हालत में फेंकने) के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। यदि पुलिस का जांच का एंगल सही है तो मानवीय रिश्तों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है कि कोई कैसे अपने कलेजे के टुकड़े का झाड़ियों में फेंक कर मरने के लिए छोड़ सकता है? यह मामला रविवार को उस समय सामने आया, जब नलवा गांव निवासी लीला शौच के लिए सड़क किनारे नीचे उतरा।
उसने झाड़ियों में बच्ची का शव देखा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर देखा तो शव 5-6 महीने की बच्ची का था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी कुलदीप बैनीवाल मौके पर पहुंचे। आसपास रहने वाले लोगों से बात कर जानकारी जुटाई। पुलिस ने क्रशर पर कार्यरत लीला की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 317 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।