महाशिवारात्रि पर भगवान शिव को मनाने का सुनहरा मौका है। इस वर्ष बेहद खास दो योग बन रहे हैं, जानिए कब कब करें शिव पूजन।
महाशिवरात्रि का त्योहार शुक्रवार को है। मंदिरों को जगमग रोशनी से सजा दिया गया है। मंदिरों में भक्तों को परेशानी न हो इसके लिए कमेटियों ने हर प्रकार की तैयारी कर ली है। मंदिर कमेटियों की ओर से दूध का लंगर लगाया जाएगा। भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा की जाएगी। भजन कीर्तन का आयोजन होगा।
30 वर्ष बाद आया संयोग
शिव पुराण के अनुसार जब ग्रहों के राजा सूर्य अपने 12 किरणों से इस संसार को प्रकाशित करते हैं, तब फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन द्वादश ज्योतिर्लिंग अवतार के अवसर एवं भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के दिन को महाशिवरात्रि का पर्व कहते हैं।
चंडीगढ़ के सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि महाशिवरात्रि को महाअधियोग महाभिषेक योग बन रहा है। ऐसा संयोग 30 वर्ष के बाद आया है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के मंदिर में लघु रुद्र, महारुद्र अति रुद्राभिषेक और शिवार्चन करने से मनुष्य की हर प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर चढ़ता दूध
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दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्रि का पर्व इस बार स्वार्थ सिद्ध एवं सिद्ध योग पड़ने से खास होगा। चतुर्दशी तिथि 24 फरवरी की रात्रि साढ़े नौ बजे प्रारंभ होगी। जो 25 फरवरी को रात्रि सवा नौ बजे तक रहेगी। महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि व्यापिनी होने पर विशेष माना जाता है। ऐसे में चूंकि 25 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी तिथि न होने से 24 फरवरी को महाशिव रात्रि का पर्व शास्त्र सम्मत रहेगा।