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16 साल बाद हुआ था पुलवामा में शहीद जैमल सिंह का बेटा, बताया- क्या थे पिता के आखिरी शब्द
Fri, 15 Feb 2019 03:46 PM IST
ajay kumar
रोहित शर्मा, अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
रोहित शर्मा, अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 15 Feb 2019 03:46 PM IST
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जैमल सिंह सीआरपीएफ
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शादी के 16 साल बाद हुआ था पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हए जैमल सिंह का बेटा, जो आज 5 साल का है और शहादत से पहले पिता द्वारा बोले गए आखिरी शब्द बता रहा है। सुनकर आपकी आंखें भी नम हो जाएंगी।
जैमल सिंह सीआरपीएफ
पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में मोगा जिले के गांव गलोटी निवासी जैमल सिंह शहीद हो गए। शादी के करीब 16 साल के बाद उनके घर एक बेटे ने जन्म लिया, जो अब पांच साल का है। शहीद के पांच वर्षीय बेटा गुरप्रकाश ने कहा, पापा से सुबह ही फोन पर बात हुई थी, वो कह रहे थे कि यहां ट्रैफिक बहुत है, शाम को बात करेंगे, लेकिन इसके बाद पापा खामोश हो गए।
जैमल सिंह सीआरपीएफ
शहीद की पत्नी सुखजीत कौर ने बताया कि सुबह के समय उनका फोन आया था और कह रहे थे कि उन्हें परिवार की बहुत याद आ रही है। जैमल ने बताया कि वे श्रीनगर जा रहे हैं। यहां ट्रैफिक बहुत है, शाम को पहुंचकर बात करेगा। लेकिन शाम को टीवी चैनलों पर खबर चलने लगी कि फौजियों पर आतंकवादियो ने हमला कर दिया है, जिसके बाद से परिवार की सांसे अटक सी गई और रात होते होते शहादत की खबर पुख्ता हो गई।
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जैमल सिंह सीआरपीएफ
सुखजीत कौर ने बताया कि उन्हें रात करीब साढ़े दस बजे पुष्टि हुई कि आतंकी हमले के दौरान शहीद होने वाले करीब 40 जवानों में जैमल सिंह भी शामिल है। जिसके बाद शहीद के परिवार समेत गांव गलोटी में मातम छा गया। जैमल ड्राइवर थे और जब यूनिट एक से दूसरी जगह शिफ्ट की जा रही थी, तब सीआरपीएफ की बस को वही चला रहे थे। जैसे ही काफिला पुलवामा पहुंची, एक एसयूवी गाड़ी बस से आकर भिड़ गई। टक्कर लगते ही धमाका हो गया और बस के परखच्चे उड़ गए।
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जैमल सिंह सीआरपीएफ
सुखजीत कौर ने बताया कि जैमल सिंह 19 साल की उम्र में सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। उनका जन्म 26 अप्रैल 1974 को हुआ था। वे अपने बेटे के काफी करीब थे और अक्सर बहुत देर तक उससे फोन पर बात किया करते थे। पिता जसवंत सिंह से उन्हें सेना में भर्ती होने की प्रेरणा मिली थी। करीब 15 दिन पहले ही जैमल सिंह छुट्टी पर घर आए थे। उनके आते ही घर में काफी खुशी का माहौल था कि अचानक खुशियां मातम में बदल गई।