घोड़ा गाड़ी चलाने वाले रामपाल को वैसे तो हॉकी की कोई ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन बेटी को ओलंपिक में खेलते देख गर्व जरूर होता है।
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hockey player rani rampal
- फोटो : amarujala
बात हो रही है, कुरुक्षेत्र के शाहबाद की बेटी हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल की। रियो ओलंपिक में भारत और जापान की महिला हॉकी टीम का मैच दो-दो की बराबरी पर छूट गया। एक समय ऐसा लग रहा था कि भारत यह मैच हार जाएगा, लेकिन आखिरी वक्त में मैच ड्रॉ हो गया। रियो से हजारों किलोमीटर दूर कुरुक्षेत्र के शाहबाद में इस ड्रॉ मैच को लेकर भी उत्साह का माहौल बन गया था। खासकर रानी रामपाल के घर उसके माता-पिता के लिए यह ड्रॉ मैच भी जीत की शुरुआत की तरह रहा।
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hockey player rani rampal
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मैच को बराबरी पर लाने में उनकी बेटी रानी रामपाल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। यह खुशी का माहौल नवजोत के घर पर भी था। बस थोड़ी मायूसी इस खातिर थी कि इंडिया मैच नहीं जीता। जी हां, घोड़ा गाड़ी चलाने वाले रामपाल को वैसे तो हॉकी की कोई ज्यादा समझ नहीं है। लेकिन बेटी के प्रदर्शन को टीवी पर देखकर बच्चों की तरह खुशी जरूर जाहिर करते हैं। रविवार को भी ऐसा ही हुआ। जापान की महिला हॉकी टीम के साथ भारतीय महिला टीम का मुकाबला शुरू हुआ।
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rani rampal father
- फोटो : amarujala
पहले हॉफ में जापान ने भारत को दो जीरो से पीछे कर रखा था। हॉफ के बाद यहां रानी रामपाल और नवजौत के परिजनों की धड़कनें भी बढ़ने लगी थीं। लेकिन इसके बाद जैसी ही पेनाल्टी कॉर्नर के जरिये रानी ने भारत का खाता खोला, यहां उसके पिता खुशी से उछल पड़े। मां भी हाथ जोड़कर भगवान का शुक्रिया अदा करने लगी। इसके बाद भारत की तरफ से एक गोल फिर हो गया तो कुछ देर पहले हार के डर से छाई मायूसी जीत की उम्मीद में बदल गई। मैच के बाद घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
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rani rampal father
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रानी के पिता रामपाल का कहना था कि बेटी और पूरी टीम अपना काम कर रही है। हम तो बस दुआ कर सकते हैं। उम्मीद है कि रानी बेहद शानदार प्रदर्शन करेगी और टीम को जीत दिलाने में उसका योगदान जरूर होगा। सभी लोग मिलजुल कर प्रयास करेंगे तो इस बार मेडल जरूर मिलेगा। बस बेटी मेडल ले आए यही दुआ है। इधर नवजोत के पिता सतनाम सिंह और पूरा परिवार भी भारत के इस प्रदर्शन से खुश हैं। आगे सभी को उम्मीद है कि टीम जीत कर लौटेगी।