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कहता था- 'मां तेरे बिना कुछ नहीं, ख्याल रखना' खुद चला गया, अब मैं कैसे जीऊंगी

Mon, 25 Dec 2017 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा) Updated Mon, 25 Dec 2017 01:17 AM IST
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Sepoy Pargat Singh killed in ceasefire violation by Pakistan in Jammu and Kashmir
पाक गोलीबारी में परगट सिंह शहीद
पाकिस्तान की गोलीबारी में शहीद हुए जवान परगट सिंह की मां नहीं जानती थी कि कल जिस बेटे का कुशलक्षेम पूछा है, आज उसकी शहादत की खबर आ जाएगी।
Sepoy Pargat Singh killed in ceasefire violation by Pakistan in Jammu and Kashmir
पाक गोलीबारी में परगट सिंह शहीद
और जैसे ही बेटे की शहादत की खबर पहुंची, मां सुखविंद्र कौर का कलेजा फट गया। बोली- शुक्रवार रात 10 बजे प्रगट सिंह का फोन आया था। 10 मिनट तक बात की थी। कह रहा था सब ठीक है। कल सुबह फोन करूंगा, लेकिन फोन नहीं आया। शाम पांच बजे ही पता चला कि वो शहीद हो गया। हमेशा कहता था कि मां तेरे बिना कुछ नहीं। तू अपना ख्याल रखना। अब मैं कैसे जीऊंगी।
Sepoy Pargat Singh killed in ceasefire violation by Pakistan in Jammu and Kashmir
पाक गोलीबारी में परगट सिंह शहीद
परगट सिंह के पिता रत्न सिंह बताते हैं कि उस की ट्रेनिंग रांची में हुई थी। वह सेकेंड बेस्ट रंगरूट रहा था। उसे सम्मानित भी किया गया था। वह कुश्ती का अच्छा खिलाड़ी था। साउथ सूडान में यूनाइटेड मिशन के तहत भारतीय शांति सेना में भी वह साल 2012-13 में गया था। परगट सिंह के दादा जगीर सिंह कहते हैं कि जब भी ड्यूटी पर जाता था, कहकर जाता था जल्दी आ जाऊंगा अपना ख्याल रखना।
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Sepoy Pargat Singh killed in ceasefire violation by Pakistan in Jammu and Kashmir
पाक गोलीबारी में परगट सिंह शहीद
दादी प्यार कौर को यकीन ही नहीं हो रहा कि जिसे गोद में खिलाया, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा। परगट का 5 साल का बेटा दिवराज अपने दादा रत्न सिंह से बार-बार पूछ रहा है कि पापा कब आएंगे। दादा भी आंसू थामते हुए यही कह रहे जल्दी आएंगे तेरे पापा। शहीद जवान के बेटे को मालूम ही नहीं है कि पापा अब कभी नहीं आएंगे। बताओ उसे कैसे समझाया जाए कि उसके पिता उसे छोड़कर चले गए।
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Sepoy Pargat Singh killed in ceasefire violation by Pakistan in Jammu and Kashmir
पाक गोलीबारी में परगट सिंह शहीद
परगट सिंह के पिता बताते हैं कि सेना में जाने की उसकी खुद की जिद थी। वह जिद तो पूरी हो गई, लेकिन बेटे को कर्नल बनाने की जिद पूरी नहीं हो पाई। परगट तीन भाई बहनों में सबसे छोटा था। 12 दिसंबर को ही छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गया था। साल 2006 में उसने आर्मी में सिख रेजीमेंट ज्वाइन की थी। दसवीं के बाद करनाल आईटीआई में इलेक्ट्रानिक की ट्रेड से परीक्षा पास की थी।
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