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सीधी सादी पंजाबन लड़की, 18 की उम्र में शादी, कैसे बन गई राधे मां जानिए

Fri, 06 Oct 2017 09:06 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 06 Oct 2017 09:06 AM IST
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Self styled god woman Radhe Maa sat on chair of SHO at Vivek Vihar police station in Delhi
राधे मां
सीधी सी 10वीं पास पंजाबन लड़की थी। 18 साल की उम्र में शादी हो गई थी, लेकिन खुद को देवी बताने वाली विवादास्पद और ग्लैमरस धर्मगुरु राधे मां बन गई, जानिए कैसे।
Self styled god woman Radhe Maa sat on chair of SHO at Vivek Vihar police station in Delhi
राधे मां
दरअसल, राधे मां एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिया कि पुलिस विभाग भी चौंक गया। वे थाने में पहुंची और एसएचओ की कुर्सी पर बैठ गईं। दिल्ली के विवेक विहार ​थाने में राधे मां ने यह काम किया। एक तस्वीर सामने आई है, इसमें एसएचओ साहब भी वर्दी पहने, मां की चुनरी ओढ़े हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर अष्टमी के दिन की बताई जा रही है।
Self styled god woman Radhe Maa sat on chair of SHO at Vivek Vihar police station in Delhi
राधे मां
राधे मां, एक सीधी सी 10वीं पास पंजाबन लड़की थी। 18 साल की उम्र में शादी हो गई थी। पंजाब के एक हलवाई के बेटे की बहू थी। राधे मां उर्फ गुड़िया उर्फ सुखविंदर कौर का जन्म 1964 में गांव दोरांगला (गुरदासपुर) में हुआ था। जब सुखविंदर कौर 18 साल की थी तो उनका विवाह करम सिंह हलवाई के बेटे मोहन सिंह के साथ हो गया। मोहन सिंह ने कुछ समय मिठाई की दुकान की और फिर दोहा कतर चला गया।
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Self styled god woman Radhe Maa sat on chair of SHO at Vivek Vihar police station in Delhi
राधे मां
पति का विदेश जाना राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इस दौरान उसने कपड़े भी सिले और जल्द ही अध्यात्म की दिशा में मुड़ गई। 23 साल की उम्र में सुखविंदर मुकेरियां में डेरा परमहंस बाग के महंत रामाधीन दास की शिष्या बन गई। महंत ने उसे आध्यात्मिक दीक्षा दी और ‘राधे मां’ के रूप में नया नाम दिया। आज उनके लाखों फोलोअर्स हैं। वे अपने अनोखे पहरावे को लेकर चर्चा में रहती हैं।
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Self styled god woman Radhe Maa sat on chair of SHO at Vivek Vihar police station in Delhi
राधे मां
नया नाम मिलने के बाद वह सत्संग करने लगी और खानपुर में मां भगवती मंदिर राधे मां का आध्यात्मिक केंद्र बन गया। लोग कहते हैं कि इस तरह के सत्संग के दौरान वह अपने भक्तों को वरदान देती थी जिससे उनके संकट दूर रहते थे। ऐसा ही एक आशीर्वाद राधे मां ने मुंबई के एक भक्त को दिया और उसका कोई गंभीर मसला हल हो गया। वही भक्त राधे मां को मुंबई ले गया। इसके बाद वह नियमित रूप से मुकेरियां आती रहीं।
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