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गोहाना के स्कूल में सुविधाओं की होगी जांच: 104 विद्यार्थियों की शिकायत पर मानवधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
Wed, 23 Sep 2026 11:13 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 23 Sep 2026 11:13 AM IST
सार
शिकायतों में खेल मैदान नहीं होने, कक्षाओं में पर्याप्त जगह और हवा-रोशनी की कमी, प्रयोगशाला व खेल सुविधाओं के अभाव तथा स्कूल के आसपास कथित अतिक्रमण के आरोप लगाए गए हैं। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ सुरक्षित और पर्याप्त विद्यालयी आधारभूत सुविधाएं भी जुड़ी हैं।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग
- फोटो : फाइल
विस्तार
गोहाना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अब जांच के दायरे में आ गई है। विद्यालय के विद्यार्थियों की ओर से की गई 104 शिकायतों पर हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए स्कूल का भौतिक निरीक्षण कराने और विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतों में खेल मैदान नहीं होने, कक्षाओं में पर्याप्त जगह और हवा-रोशनी की कमी, प्रयोगशाला व खेल सुविधाओं के अभाव तथा स्कूल के आसपास कथित अतिक्रमण के आरोप लगाए गए हैं।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ सुरक्षित और पर्याप्त विद्यालयी आधारभूत सुविधाएं भी जुड़ी हैं। हालांकि, शिकायतों में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष से पहले मौके पर उनका तथ्यात्मक सत्यापन जरूरी है।
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जमीन से लेकर कक्षाओं तक होगी जांच
आयोग ने महानिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, हरियाणा को जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत के माध्यम से स्कूल का निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में स्कूल के नाम या कब्जे में दर्ज कुल भूमि, उसकी वर्तमान स्थिति, खेल मैदान की उपलब्धता, कक्षाओं की संख्या और उनके आकार की जानकारी देनी होगी। साथ ही कक्षाओं में वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी, प्रयोगशाला, खेल सुविधाएं, शौचालय, पेयजल और विद्यार्थियों के वर्तमान नामांकन का भी ब्योरा मांगा गया है।
विद्यार्थियों ने करीब 3.5 एकड़ भूमि का भी उल्लेख किया है। आयोग ने इस जमीन के स्वामित्व और स्थिति की जांच कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि यह भूमि स्कूल भवन या खेल मैदान के लिए निर्धारित अथवा उपलब्ध है या नहीं।
अतिक्रमण मिला तो कार्रवाई की जानकारी देनी होगी
उपायुक्त सोनीपत को राजस्व या स्थानीय प्राधिकारी के माध्यम से जमीन के स्वामित्व और कथित अतिक्रमण का सत्यापन कराने को कहा गया है। यदि स्कूल की स्वामित्व वाली अथवा उसके लिए निर्धारित जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी भी आयोग को देनी होगी।
आयोग ने स्कूल भवन, कक्षाओं, प्रयोगशाला, कार्यशाला, खेल मैदान, आसपास की जमीन और कथित अतिक्रमण के हालिया फोटो के साथ साइट प्लान और सीमांकन रिपोर्ट भी मांगी है।
स्थायी व्यवस्था होने तक अस्थायी सुविधा का भी ब्योरा
आयोग ने यह भी पूछा है कि स्थायी सुधार होने तक विद्यार्थियों के लिए खेल और अन्य जरूरी सुविधाओं की तत्काल या अस्थायी व्यवस्था की जरूरत है या नहीं। निरीक्षण रिपोर्ट में हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमों और निर्धारित मानकों के अनुसार मौजूदा सुविधाओं के अनुपालन की स्थिति भी बतानी होगी।
आयोग ने शिक्षा का अधिकार सार्थक बनाने के लिए पर्याप्त कक्षाओं, उचित वेंटिलेशन, प्राकृतिक प्रकाश और खेल मैदान जैसी सुविधाओं की जरूरत पर इलाहाबाद और दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों का भी उल्लेख किया है।
4 नवंबर को अगली सुनवाई
शिकायत संख्या 2844/7/19/2026 को मुख्य शिकायत मानते हुए आयोग ने समान मुद्दों वाली बाकी 103 शिकायतों पर भी यही आदेश लागू किया है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी। संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी
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शिकायतों में खेल मैदान नहीं होने, कक्षाओं में पर्याप्त जगह और हवा-रोशनी की कमी, प्रयोगशाला व खेल सुविधाओं के अभाव तथा स्कूल के आसपास कथित अतिक्रमण के आरोप लगाए गए हैं।
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आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ सुरक्षित और पर्याप्त विद्यालयी आधारभूत सुविधाएं भी जुड़ी हैं। हालांकि, शिकायतों में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष से पहले मौके पर उनका तथ्यात्मक सत्यापन जरूरी है।
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जमीन से लेकर कक्षाओं तक होगी जांच
आयोग ने महानिदेशक, माध्यमिक शिक्षा, हरियाणा को जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत के माध्यम से स्कूल का निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में स्कूल के नाम या कब्जे में दर्ज कुल भूमि, उसकी वर्तमान स्थिति, खेल मैदान की उपलब्धता, कक्षाओं की संख्या और उनके आकार की जानकारी देनी होगी। साथ ही कक्षाओं में वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी, प्रयोगशाला, खेल सुविधाएं, शौचालय, पेयजल और विद्यार्थियों के वर्तमान नामांकन का भी ब्योरा मांगा गया है।
विद्यार्थियों ने करीब 3.5 एकड़ भूमि का भी उल्लेख किया है। आयोग ने इस जमीन के स्वामित्व और स्थिति की जांच कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि यह भूमि स्कूल भवन या खेल मैदान के लिए निर्धारित अथवा उपलब्ध है या नहीं।
अतिक्रमण मिला तो कार्रवाई की जानकारी देनी होगी
उपायुक्त सोनीपत को राजस्व या स्थानीय प्राधिकारी के माध्यम से जमीन के स्वामित्व और कथित अतिक्रमण का सत्यापन कराने को कहा गया है। यदि स्कूल की स्वामित्व वाली अथवा उसके लिए निर्धारित जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है तो उसे हटाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई की जानकारी भी आयोग को देनी होगी।
आयोग ने स्कूल भवन, कक्षाओं, प्रयोगशाला, कार्यशाला, खेल मैदान, आसपास की जमीन और कथित अतिक्रमण के हालिया फोटो के साथ साइट प्लान और सीमांकन रिपोर्ट भी मांगी है।
स्थायी व्यवस्था होने तक अस्थायी सुविधा का भी ब्योरा
आयोग ने यह भी पूछा है कि स्थायी सुधार होने तक विद्यार्थियों के लिए खेल और अन्य जरूरी सुविधाओं की तत्काल या अस्थायी व्यवस्था की जरूरत है या नहीं। निरीक्षण रिपोर्ट में हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमों और निर्धारित मानकों के अनुसार मौजूदा सुविधाओं के अनुपालन की स्थिति भी बतानी होगी।
आयोग ने शिक्षा का अधिकार सार्थक बनाने के लिए पर्याप्त कक्षाओं, उचित वेंटिलेशन, प्राकृतिक प्रकाश और खेल मैदान जैसी सुविधाओं की जरूरत पर इलाहाबाद और दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों का भी उल्लेख किया है।
4 नवंबर को अगली सुनवाई
शिकायत संख्या 2844/7/19/2026 को मुख्य शिकायत मानते हुए आयोग ने समान मुद्दों वाली बाकी 103 शिकायतों पर भी यही आदेश लागू किया है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी। संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी