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हरियाणा में 80 लाख टन पराली का प्रबंधन: 25 लाख टन उद्योगों में खपाने की तैयारी, तीन स्तरीय रणनीति तैयार
Wed, 23 Sep 2026 10:21 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 23 Sep 2026 10:21 AM IST
सार
कृषि विभाग के मुताबिक सरकार की कार्ययोजना में कम से कम 31 प्रतिशत अनुमानित पराली यानी 25 एलएमटी को औद्योगिक उपयोग में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। सीबीजी क्षेत्र को पराली के एक्स-सीटू इस्तेमाल का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। पानीपत स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के संयंत्र द्वारा करीब 2.63 एलएमटी पराली खरीदने की संभावना है।
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पराली
- फोटो : ANI
विस्तार
हरियाणा सरकार ने आगामी धान कटाई सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए तीन स्तरीय रणनीति तैयार की है। इस बार विभाग ने लगभग 80 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) पराली पैदा होने का अनुमान है।
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बासमती से 21 एलएमटी से अधिक और गैर-बासमती से 58 एलएमटी से अधिक पराली पैदा होने की संभावना है। सरकार की योजना करीब 45 एलएमटी पराली का इन-सीटू प्रबंधन, 10 एलएमटी का पशु चारे के रूप में इस्तेमाल और करीब 25 एलएमटी पराली को खेतों से बाहर निकालकर एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत औद्योगिक उपयोग में लाने की है।
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कृषि विभाग के मुताबिक सरकार की कार्ययोजना में कम से कम 31 प्रतिशत अनुमानित पराली यानी 25 एलएमटी को औद्योगिक उपयोग में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। चार मिश्रित ईंधन आधारित बायोमास बिजली संयंत्र, पांच धान की पराली आधारित बायोमास परियोजनाएं, 15 अन्य उद्योग, छह सीबीजी इकाइयां, पानीपत का एक एथनॉल संयंत्र, तीन थर्मल पावर प्लांट और पेलेट निर्माता पराली की खरीद करेंगे।
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बायोमास बिजली संयंत्रों की संयुक्त क्षमता 91 मेगावाट से अधिक है और इनके द्वारा करीब 12 एलएमटी पराली खरीदने का अनुमान है। सीबीजी संयंत्र करीब 3 एलएमटी, पानीपत का एथनॉल संयंत्र 50 हजार टन, जबकि थर्मल पावर प्लांट करीब 7 एलएमटी पराली का उपयोग कर सकते हैं। पेलेट प्लांट करीब 9,300 टन और अन्य उपयोगकर्ता करीब 3,000 टन पराली लेने की संभावना है। पराली से बॉयलर चलाने वाले 15 उद्योगों ने कुल 79,900 टन पराली खरीदने की जरूरत बताई है।
कार्ययोजना में एक्स-सीटू प्रबंधन का कुल लक्ष्य 24.77 एलएमटी है, जबकि चिन्हित संयंत्रों और उद्योगों की उपलब्ध खरीद योजनाएं करीब 23.37 एलएमटी की हैं। इस प्रकार लक्ष्य और उपलब्ध खरीद योजना के बीच अंतर भी सामने आया है।
सीबीजी और थर्मल पावर प्लांट से बड़ी उम्मीद
सीबीजी क्षेत्र को पराली के एक्स-सीटू इस्तेमाल का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। पानीपत स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के संयंत्र द्वारा करीब 2.63 एलएमटी पराली खरीदने की संभावना है। वर्तमान में रिलायंस के दो संयंत्र संचालित हैं, जबकि 2026 में तीन और संयंत्र शुरू होने की संभावना जताई गई है। एनटीपीसी झज्जर और हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट करीब 5.16 एलएमटी पराली का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा थर्मल पावर प्लांटों में को-फायरिंग के लिए करीब 1.78 एलएमटी पेलेट इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। पानीपत स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एथनॉल प्लांट ने 50 हजार टन पराली खरीदने की जानकारी दी है।
क्या होता है इन सीटू व एक्स सीटू
इन-सीटू प्रबंधन में पराली को मशीनों से छोटे टुकड़ों में काटकर खेत की मिट्टी में मिला दिया जाता है। वहीं एक्स-सीटू प्रबंधन में पराली खेत से बाहर निकालकर बायोमास बिजली परियोजनाओं, सीबीजी संयंत्रों, एथनॉल प्लांट, थर्मल पावर प्लांट और अन्य उद्योगों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल की जाती है। अधिकारियों के अनुसार पहले एक्स-सीटू व्यवस्था अपनाने वाले किसानों को भी इन-सीटू प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।