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सेना में नहीं जाना चाहते शहीद के तीनों बेटे, देखिए किसका क्या सपना?

Thu, 24 Nov 2016 09:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Thu, 24 Nov 2016 09:29 AM IST
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school will provide free education to head constable rai singh, big tribute to martyr
रोहतक के सांपला में शहीद राय सिंह का संस्कार
शहीद राय सिंह के तीनों बेटे सेना में नहीं जाना चाहते। छोटे बेटे ने जरूर पाकिस्तान से पिता की हत्या का बदला लेने की ठानी है। देखिए, तीनों के सपने क्या?
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राजौरी में शहीद हुए हरियाणा के हेड कांस्टेबल राय सिंह
हितेष : दसवीं में पढ़ाई करने वाले हितेष का कहना है कि वह पिता का नाम रोशन करने के लिए डॉक्टर बनना चाहता है, ताकि पूरे परिवार को गर्व हो सके।
कर्मबीर- दूसरा बेटा कर्मबीर पिता के नक्शेकदम पर चलना चाहता है। उसका कहना है कि वह पढ़ाई के साथ ही सेना में जाने की तैयारी शुरू करेगा। कर्मबीर नौवीं कक्षा में पढ़ता है।
 
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राजौरी में हरियाणा का हेड कांस्टेबल राय सिंह शहीद
पारस- अपने माता-पिता का चहेते तीसरे बेटे पारस ने देश सेवा करने की ठानी है। वह कहता है कि इंडियन नेवी में बड़े पद पर काम करना चाहता है। इसके लिए दसवीं के बाद से तैयारी शुरू कर देगा।
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रोहतक के सांपला में शहीद राय सिंह का संस्कार
प्रज्ञा हाईस्कूल में शहीद के तीनों बेटे पढ़ाई करते हैं। स्कूल प्रशासन ने राय सिंह की शहादत पर तीनों बेटों को निशुल्क शिक्षा देने का एलान किया है। स्कूल के निदेशक अनूप बंसल और प्रिंसिपल पुनीत बंसल ने बताया कि राय सिंह के बड़े बेटे हितेष दसवीं, कर्मबीर नौंवी और सबसे छोटा बेटा पारस छठी कक्षा में पढ़ाई करते हैं। अभी तक तीनों बच्चों से फीस ली जा रही थी, लेकिन अब नहीं ली जाएगी।
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Fureral of Martyr Rai Singh - फोटो : अमर उजाला
शहादत के साथ ही राय सिंह खेड़ी सांपला से देश के लिए शहीद होने वाले पहले जवान बन गए। ग्रामीणों की मानें तो राय सिंह से पहले इस गांव का कोई जवान देश के लिए शहीद नहीं हुआ है। शहीद के बेटे हितेष ने बताया कि अंतिम बार पापा से उसी की बात हुई थी। उन्होंने पढ़ाई लिखाई के बारे में पूछा था। इसके बाद देर रात हेड क्वार्टर से उनके शहीद होने की सूचना मिली।

 
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