समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट को आज 10 साल हो गए हैं, लेकिन लोगों के घाव अभी तक नहीं भरे। न ही अभी तक न्याय मिल पाया है, जानिए इस दर्दनाक हादसे की पूरी कहानी।
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समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
समझौता ट्रेन में बम ब्लास्ट की 10वीं बरसी हरियाणा के पानीपत में महराना गांव स्थित कब्रिस्तान में मनाई गई। धमाके में मारे गये 29 यात्रियों के शवों की उस वक्त शिनाख्त न होने पर पानीपत के गांव महराना स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया था। हर साल की तरह इस वर्ष भी उनकी आत्मा की शांति के लिए गांव महराना में शोक सभा का आयोजन किया गया। ब्लास्ट में मारे गए 69 लोगों की आत्मा की शांति के लिए कुरान की आयतें पढ़ी गई।
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समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने की बात होती है तो कोई न कोई घटना हो जाती है। ऐसी ही घटना 18 फरवरी 2007 की रात को ठीक उस समय हुई थी, जिस दिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी भारत की यात्रा पर आने वाले थे। ट्रेन दिल्ली से पाकिस्तान जा रही थी। ट्रेन 11 बजकर 53 मिनट पर दीवाना रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो उसमें ब्लास्ट हो गया था, जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी।
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समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
हादसे में मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी थे, जिन्हें पानीपत के शमशान में दफना दिया गया था। उनमें से आज भी 19 कब्र ऐसी हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। आज भी डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं लोग। मामले की जांच पहले हरियाणा पुलिस और जीआरपी ने मिलकर की थी। 20 फरवरी, 2007 को पुलिस ने मामले में दो संदिग्ध लोगों के स्केच जारी किए थे। एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान के आधार पर पुलिस ने इन दोनों लोगों के स्केच जारी किए थे।
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समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट की बरसी
दोनों ही लोग दीवाना रेलवे स्टेशन पर रात लगभग 11 बज कर 40 मिनट पर उतर गए थे। इसके थोड़ी ही देर बाद ट्रेन में धमाके हुए। पुलिस ने इन संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी देने वालों को एक लाख रुपए का नकद ईनाम देने की भी घोषणा की थी, पर कोई फायदा नहीं हुआ था। जांच में सफलता नहीं मिलने के बाद साल 2011 में केस एनआईए को सौंप दी गई थी। जांच के दौरान ट्रेन मे और विस्फोटक साम्रगियां भी पाई गई।