'धाकड़ गर्ल' साक्षी मलिक का हौंसला देखिए, न केवल दुनिया से जीती। बल्कि अपनों से ही अपने ही हक की लड़ाई लड़ी और जीत गई।
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ग्लैमरस हो गई है ये ओलंपियन पहलवान
रियो ओलंपिक में देश को पहला पदक दिलाने वाली कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को बीजेपी सरकार महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक में खेल निदेशक के पद पर नौकरी दी है। यह पद सृजित किया जा चुका है। 11 मार्च को यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद की बैठक में नौकरी देने पर मुहर भी लग गई है।
साक्षी मलिक रियो ओलंपिक में देश को पहला मेडल दिलाने वाली महिला पहलवान हैं। इन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जा चुका है। अवार्ड मिलने से साक्षी मलिक बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि इस अवॉर्ड के बारे में कभी नहीं सोचा था। वह अर्जुन अवार्ड और खेल रत्न के बारे में ही सोचती थीं। अब देश का इतना बड़ा सम्मान उन्हें मिलने जा रहा है तो बेहद खुशी हुई है, लेकिन हैरानी नहीं है।
साक्षी मलिक कहती हैं कि उन्होंने जो मेहनत की है, उसका फल अब मिला है और अभी तो ओर मेहनत करनी है। अभी तो मुझे पदम भूषण और पदम विभूषण भी लेना है। साथ ही अब लक्ष्य अगले साल एशियन व कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल करना है। टोकयो ओलंपिक में देश को पदक दिलाना है। पद्मश्री मिलने के बाद से साक्षी मलिक और उनका परिवार काफी खुश है।
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ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान साक्षी मलिक
साक्षी मलिक कहती हैं कि एक लड़की क्या कुछ नहीं कर सकती। जब मैं कर सकती हूं, तो कोई भी लड़की कर सकती है। मुझे लगता है कि हरियाणा में अब मां-बाप अपनी बेटियों की अहमियत, उसकी काबिलियत पर ऐतबार करेंगे, उसे तवज्जो देंगे। बेटियों को आगे बढ़ाएंगे। पढ़ाई में, खेल में, समाज के हर क्षेत्र में बेटियों को बढ़ावा मिले, इसके लिए मैं हर फोरम से आवाज उठाने को तैयार हूं।