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'निरोगी काया सुखी जीवन' चाहिए तो आयुर्वेद के ये नियम अपना लीजिए, बीमार नहीं पड़ेंगे कभी
Mon, 07 Oct 2019 04:41 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 07 Oct 2019 04:41 PM IST
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फाइल फोटो
सुखद जीवन जीने के हर ज्ञान को आयुर्वेद ने खुद में समेट रखा है। इसमें शरीर की रक्षा और रोग निवारण दोनों के लिए व्यवस्थित और क्रमबद्ध ज्ञान उपलब्ध है। बस जरूरत है, इसे अपनाने की। विशेषज्ञ कहते हैं कि आयुर्वेद को जिसने अपने जीवन में ढाल लिया, वह व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ सकता। हालांकि इसके लिए आयुर्वेद के नियमों को सख्ती से लागू करना होगा और फिर आप देखेंगे कि आपके जीवन में किस तरह से बदलाव आता है। मानसिक व शारीरिक संतुलन ही आयुर्वेद है। आइए जानते हैं आयुर्वेद के उन नियमों को, जिन्हें अपनाकर आप स्वस्थ रह सकते हैं।
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सुबह उठने और उसके बाद का नियम
आपको सूर्योदय से पहले उठना होगा। नितकर्म करने के बाद 25-30 मिनट तक व्यायाम या योग करें, जो शारीरिक मजबूती प्रदान करेगा। मानसिक मजबूती के लिए ध्यान (मेडिटेशन) करें। यह कम से कम 48 मिनट का होना चाहिए। शुरुआत में कुछ समय के लिए करें। फिर इसका समय धीरे-धीरे बढ़ाएं। आयुर्वेद में शारीरिक व मानसिक दोनों की मजबूती की बात कही गई है। आप भले ही शरीर बना लें, मगर जब तक मन शांत नहीं होगा, तब उस शरीर का कोई फायदा नहीं।
आपको सूर्योदय से पहले उठना होगा। नितकर्म करने के बाद 25-30 मिनट तक व्यायाम या योग करें, जो शारीरिक मजबूती प्रदान करेगा। मानसिक मजबूती के लिए ध्यान (मेडिटेशन) करें। यह कम से कम 48 मिनट का होना चाहिए। शुरुआत में कुछ समय के लिए करें। फिर इसका समय धीरे-धीरे बढ़ाएं। आयुर्वेद में शारीरिक व मानसिक दोनों की मजबूती की बात कही गई है। आप भले ही शरीर बना लें, मगर जब तक मन शांत नहीं होगा, तब उस शरीर का कोई फायदा नहीं।
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नाश्ता कैसा करें
ध्यान करने के बाद स्नान कर लें। उसके बाद नाश्ते की बारी आती है। कहा जाता है कि लोगों को हैवी नाश्ता करना चाहिए लेकिन आयुर्वेद कुछ और कहता है। आयुर्वेद के मुताबिक, नाश्ता उतना ही करें, जितना आपका शरीर आसानी से पचा ले। नाश्ते में मौसम के मुताबिक ताजी सब्जी (कोई भी हरी सब्जी) और रोटी ले सकते हैं। रोटी में गेहूं की बजाय मक्के की रोटी लें। यदि सर्दी है तो बाजरे का इस्तेमाल करें। गेहूं की रोटी का इस्तेमाल दिन के खाने में करें। देसी घी जरूर लें। घी यदि गाय का हो तो काफी फायदा करेगा। यह दिमाग को शांत करता है। इसमें एक बात का ध्यान रखना होगा। कई लोग अक्सर करते भी हैं कि रात की सब्जी बची थी। सुबह उसे गर्म कर खा लिया। यह सबसे ज्यादा नुकसानदायक होता है।
ध्यान करने के बाद स्नान कर लें। उसके बाद नाश्ते की बारी आती है। कहा जाता है कि लोगों को हैवी नाश्ता करना चाहिए लेकिन आयुर्वेद कुछ और कहता है। आयुर्वेद के मुताबिक, नाश्ता उतना ही करें, जितना आपका शरीर आसानी से पचा ले। नाश्ते में मौसम के मुताबिक ताजी सब्जी (कोई भी हरी सब्जी) और रोटी ले सकते हैं। रोटी में गेहूं की बजाय मक्के की रोटी लें। यदि सर्दी है तो बाजरे का इस्तेमाल करें। गेहूं की रोटी का इस्तेमाल दिन के खाने में करें। देसी घी जरूर लें। घी यदि गाय का हो तो काफी फायदा करेगा। यह दिमाग को शांत करता है। इसमें एक बात का ध्यान रखना होगा। कई लोग अक्सर करते भी हैं कि रात की सब्जी बची थी। सुबह उसे गर्म कर खा लिया। यह सबसे ज्यादा नुकसानदायक होता है।
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दोपहर का भोजन कैसा हो
आयुर्वेद के मुताबिक, संतुलित भोजन वही है, जिसमें छह रस मौजूद हों। ये रस हैं मधुर (मीठा), लवण (नमकीन), अम्ल (खट्टा), कटु (कड़वा), तिक्त (तीखा) और कषाय (कसैला)। इसका मतलब है कि खाने में सब्जी, रोटी, दाल, चावल के साथ सलाद, आचार, मिर्च, रायता और कुछ मीठा भी होना चाहिए। यहां भी इस बात का ध्यान रखना है कि छह रस के चक्कर में खाना हैवी न हो जाए। जितनी शरीर की क्षमता हो, उतना ही खाइए। खाना खाने के बाद कुछ आराम भी करें। दफ्तर में काम करने वाले व्यक्ति हर डेढ़ घंटे बाद काम से दस मिनट का विश्राम से लें। इससे उनकी काम करने की क्षमता बढ़ेगी और मन भी शांत रहेगा। रात के खाने से पहले एक कप चाय या कॉफी भी ले सकते हैं।
आयुर्वेद के मुताबिक, संतुलित भोजन वही है, जिसमें छह रस मौजूद हों। ये रस हैं मधुर (मीठा), लवण (नमकीन), अम्ल (खट्टा), कटु (कड़वा), तिक्त (तीखा) और कषाय (कसैला)। इसका मतलब है कि खाने में सब्जी, रोटी, दाल, चावल के साथ सलाद, आचार, मिर्च, रायता और कुछ मीठा भी होना चाहिए। यहां भी इस बात का ध्यान रखना है कि छह रस के चक्कर में खाना हैवी न हो जाए। जितनी शरीर की क्षमता हो, उतना ही खाइए। खाना खाने के बाद कुछ आराम भी करें। दफ्तर में काम करने वाले व्यक्ति हर डेढ़ घंटे बाद काम से दस मिनट का विश्राम से लें। इससे उनकी काम करने की क्षमता बढ़ेगी और मन भी शांत रहेगा। रात के खाने से पहले एक कप चाय या कॉफी भी ले सकते हैं।
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रात में खाने के बाद न करें सैर
कोशिश करें कि रात का खाना जितना जल्दी हो सके खा लें। खाना हल्का रखें और ऐसा हो जो पचने में आसान हो। खाना खाना के बाद अक्सर लोग सैर करते हैं, जो गलत है। खाना खाने के बाद सौ कदम चलें और बायीं करवट लेकर 48 मिनट लेट जाएं। इसके पीछे आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का तर्क है कि खाना खाने के बाद एंजाइम सक्रिय होने चाहिए और एंजाइम के लिए प्रॉपर ब्लड फ्लो चाहिए होता है। नेचुरल ब्लड फ्लो इंटेस्टाइन और लिवर की तरफ होता है, लेकिन जैसे ही हम सैर करते हैं या चलते हैं तो मसल्स नेचुरल ब्लड फ्लो को अपनी तरफ मोड़ लेते हैं। इससे आर्गन ठीक ढंग से काम नहीं करते हैं और एंजाइम नहीं बनते। इससे खाना पचता नहीं है। बायीं करवट लेने के पीछे का तर्क है कि खाना स्टमक में पहुंच जाता और उसे पचने की प्रॉपर जगह मिलती है। दायीं तरफ लिवर है। दायीं तरफ लेटने से स्टमक को जगह नहीं मिलती। खाना खाने के बाद दूध ले सकते हैं। यदि कोई कफ विकृति का है तो उसे दूध नहीं लेना चाहिए। दफ्तर देर से लौटने वाले भी यह तरीका अपना सकते हैं।
कोशिश करें कि रात का खाना जितना जल्दी हो सके खा लें। खाना हल्का रखें और ऐसा हो जो पचने में आसान हो। खाना खाना के बाद अक्सर लोग सैर करते हैं, जो गलत है। खाना खाने के बाद सौ कदम चलें और बायीं करवट लेकर 48 मिनट लेट जाएं। इसके पीछे आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का तर्क है कि खाना खाने के बाद एंजाइम सक्रिय होने चाहिए और एंजाइम के लिए प्रॉपर ब्लड फ्लो चाहिए होता है। नेचुरल ब्लड फ्लो इंटेस्टाइन और लिवर की तरफ होता है, लेकिन जैसे ही हम सैर करते हैं या चलते हैं तो मसल्स नेचुरल ब्लड फ्लो को अपनी तरफ मोड़ लेते हैं। इससे आर्गन ठीक ढंग से काम नहीं करते हैं और एंजाइम नहीं बनते। इससे खाना पचता नहीं है। बायीं करवट लेने के पीछे का तर्क है कि खाना स्टमक में पहुंच जाता और उसे पचने की प्रॉपर जगह मिलती है। दायीं तरफ लिवर है। दायीं तरफ लेटने से स्टमक को जगह नहीं मिलती। खाना खाने के बाद दूध ले सकते हैं। यदि कोई कफ विकृति का है तो उसे दूध नहीं लेना चाहिए। दफ्तर देर से लौटने वाले भी यह तरीका अपना सकते हैं।